January 23, 2021

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farmers protest - hunger strike

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किसानों की राष्ट्रव्यापी भूख हड़ताल आज, जानें किसानों के विरोध प्रदर्शन की कुछ महत्वपूर्ण बातें

नई दिल्ली। जैसे – जैसे किसानों का विरोध प्रदर्शन आगे बढ़ रहा है। वैसे – वैसे स्थिति ख़राब होती जा रही है। आज यानी सोमवार को किसान प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। किसानों की यह भूख हड़ताल नौ घंटो तक चलने वाली है। किसानों ने देश भर में प्रदर्शन कि योजना बनाई है। इससे पहले भी मंगलवार को विपक्षी दलों और ट्रेड यूनियन के द्वारा “भारत बंद” के लिए कॉल का समर्थन किया गया था, ये भूख हड़ताल किसानों के विरोध प्रदर्शन में दूसरा राष्ट्रव्यापी विरोध है।

किसानों की सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद भी, अभी तक इसका कोई हल नहीं निकल पाया है। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार द्वारा नए कानूनों को वापस नहीं लिया जाएगा तब तक ये विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

जानें विरोध प्रदर्शन की कुछ महत्वपूर्ण बातें :

आज की किसानों द्वारा कि जा रही भूख हड़ताल, इस विरोध प्रदर्शन को तेज़ करने की ओर किसानों द्वारा बढ़ाया गया कदम है। कुल 33 किसान नेता आज हरियाणा – दिल्ली सीमा पर सिंघू में भूख हड़ताल कर रहे हैं।

इसी के साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को बताया के वे भी किसानों के साथ एक दिन का उपवास करेंगे। केजरीवाल ने कहा ” मैं किसानों के विरोध के समर्थन में कल एक दिन का उपवास रखूंगा। मैं AAP के स्वयंसेवकों से ये अपील करना चाहता हूं के वे भी इसमें शामिल हो। किसानों की सभी मांगों को केंद्र को तुरंत स्वीकार करना चाहिए और साथ ही MSP की गारंटी के लिए भी बिल लाना चाहिए। “

रविवार को दिल्ली में मार्च शुरू करने के बाद किसानों ने दिल्ली – जयपुर हाईवे को आधा ब्लॉक कर के, वहां भी प्रदर्शन जारी रखा। जबकि कई किसानों को 100 किलोमीटर दूर हरियाणा के रेवाड़ी में रोक दिया। आज दिल्ली – जयपुर हाईवे के धरना स्थल पर एक किसान नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

भारतीय किसान यूनियन (भानु), जो कि किसानों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले प्रमुख संगठनों में से एक है, यूनियन ने नोएडा – दिल्ली हाईवे खोलने पर विरोध दिखाया है। यूनियन के अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने एक दिन बाद रक्षा मंत्री, राजनाथ सिंह से मुलाकात की। साथ ही भानु के यूपी यूनिट के चीफ योगेश प्रताप, जो पिछले 12 दिनों से चिल्ला रोड पर प्रदर्शन कर रहे थे, वो भी इस निर्णय से नाखुश हैं।

शनिवार को किसानों के विरोध प्रदर्शन को वापस लेने की मांग के कुछ घंटे बाद प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया : ” ये बिल कृषि सुधार में और कृषिकर्म में ज़्यादा निवेश लाने में मदद करेंगे “

सरकार ने किसान संगठनों के कई नेताओं की बातचीत ग्रह मंत्री अमित शाह के साथ करवाने की कोशिश की, जिसमें किसानों के समक्ष कानून में कई बदलाव और लिखित आश्वासन प्रदान किए गए। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैठक में अपना पक्ष रखा है।

थोड़ी बहस के बाद सितंबर में सांसद के माध्यम से मतदान किया गया, जिसमें सरकार का पक्ष है कि ये कानून केवल किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए विकल्प देता है, जबकि छोटे किसानों को डर है कि बड़े कॉरपोरेट खिलाड़ियों के बाज़ार में आने से, कीमतों की गारंटी नहीं होती है।

भारतीय किसान यूनियन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक याचिका दायर की गई था जिसमें उन्हें निरस्त करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट पहले ही कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक बैच पर केंद्र को नोटिस जारी कर चुकी है।

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रविवार को विपक्ष पर नए कृषि कानूनों के खिलाफ दुष्प्रचार चलाने का आरोप लगाया। केंद्रीय मंत्री ने भी किसानों के साथ कई बार बैठक की। उन्होंने कहा, ” जब सुधार किए गए हैं, तो इससे किसानों को लंबे समय में फायदा होगा, और हम जानते हैं कि बिना कठिनाइयों के हम कोई भी फायदा प्राप्त नहीं कर सकते हैं। “