कैंसर जैसी बीमारी पर कोरना महामारी का असर

CANCER IN FEMAILS

Cancer cases increase Amid corona epidemic

कोरना महामारी ने बीते 1 साल में जीवन के हर एक पहलू पर असर डाला है। लोगों के जीने का अंदाज बदल दिया इस वैश्विक महामारी ने,हर छोटी बड़ी बीमारी के साथ ही मरीजों को भी प्रभावित किया है। बीते 1 साल में कोरोना के कारण कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की स्क्रीनिंग और इलाज पर भी वायरस का खौफ का असर रहा है।

कोरना महामारी के बीच बढ़ रहे कैंसर के मामले

BREAST CANCER

केवल वायरस के संक्रमण से जीवन को खतरा नहीं है। खोलना संक्रमण के अलावा ऐसी कई बीमारियां हैं जिनका खतरा मंडरा रहा है। इनमें से एक है “ब्रेस्ट कैंसर” । ब्रिटेन की ब्रेस्ट कैंसर संस्थान के मुताबिक कोरोना के कारण करीब 10 लाख ब्रिटेनी महिलाएं अपनी सालाना ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग जांच नहीं करा पाई हैं। भारत में तो पहले से ही बड़ी तादाद में महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की शिकार रही है। जानकारों का यह कहना है कि आने वाले 10 सालों में ब्रेस्ट कैंसर हर दूसरे कैंसर को पीछे छोड़ने वाला है।

लॉकडाउन और उसके बाद अस्पतालों में दिन पा दिन दबाव बढ़ता गया, साफ तौर पर जिसका असर दूसरी बीमारियों के इलाज कराने वालों पर पड़ा। रिसर्च से इस बात की पुष्टि की गई है कि पूर्व में के कारण करीबन 40% ब्रेस्ट कैंसर के ऑपरेशन को टालना पड़ा।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2018 में भारत में कैंसर से करीबन 87 हजार मौतें हुई जिनमें से महिलाओं को होने वाले ब्रेस्ट कैंसर से करीबन 28% मौतें हुई थी। कैंसर के बढ़ते आंकड़ों के बीच कोरोना आ पहुंचा। पिछले कुछ सालों में यह पाया गया है कि भारत में कैंसर पीड़ितों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। महामारी के आने के कारण जिन मरीजों का इलाज चल रहा था उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। चिंता की बात यह भी है कि जो नए मामले सामने आए हैं उनका भी इलाज करने में परेशानी आ रही है।

डॉक्टर द्वारा बताया गया-

हमारे देश में कैंसर को लेकर कोई स्क्रीनिंग प्रोग्राम है नहींं , जोकि काफी उन्नत देश ( अमेरिका, इंग्लैंड ,कनाडा) मैं मौजूद है। स्क्रीनिंग प्रोग्राम ना होने की वजह से 60% से 70% तक ब्रेस्ट कैंसर के मरीज हमारे पास तीसरे चौथे स्टेज पर पहुंचते हैं। कोरोना के आने के कारण काफी लोग ब्रेस्ट कैंसर के बारे में अज्ञात थे, और जिन लोगों को इसके सिम्टम्स के बारे में पता था वे कोरोना के डर के कारण हॉस्पिटल आना नहीं चाह रहे थे। डॉक्टर द्वारा यह बात सामने आई है कि पिछड़े गांव से आने वाली ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं को इस बात का जिक्र करने में झिझक और शर्म आती है।

डॉक्टर द्वारा इस बात का जिक्र भी किया गया की नई उम्र की लड़कियों (14 वर्ष,20 वर्ष,24 वर्ष) में एग्रेसिव कैंसर की प्रवृत्ति पाई जा रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का बयान-

इसी साल फरवरी में केंद्र स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है कि कैंसर को नियंत्रित करने में सरकार जिला स्तर पर रोकथाम और स्क्रीनिंग और हेल्थ के लिए नेशनल हेल्थ मिशन के तहत अभियान चला रही है।

कोरोना काल में कैंसर का इलाज काफी बुरी तरीके से प्रभावित हुआ है, लेकिन इससे तेजी से फैलती इस बीमारी की रोकथाम पर फैसले लेने का भी मौका मिला है।

BREAST CANCER

QUICK UPDATES

▪️Cases of breast cancer are increasing day by day.

▪️ Aggressive Breast cancer is being found in young women!

▪️In 2018, 28% of women died of breast cancer.

▪️Cancer cases increase Amid corona epidemic.

▪️New age girls are unknown with symptoms of breast cancer.

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