January 23, 2021

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26/11 TERROR ATTACK

26/11 TERROR ATTACK

26/11 मुंबई आतंकी हमले को बीते 12 साल

26 नवंबर 2008 में गोलियों की आवाज से दहल उठी थी माया नगरी मुंबई

Mumbai was shaken by the sound of gunfire

26 नवंबर 2008 में देश की आर्थिक राजधानी कहलाने वाली मुंबई में आतंकवादी हमला हुआ था। हमला मुंबई पर हुआ पर इस हमले से पूरे देशवासियों का दिल दहल गया। 26 नवंबर की वह रात आसानी से नहीं भुलाई जा सकती। आतंकवादि हमले से पूरा देश सेहम उठा था।

आज के दिन 12 साल पहले लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादियों ने मुंबई में जगह-जगह पर बम धमाके किये। बम धमाके के साथ भारी गोलाबारी से 2611 की रात को लोगों के जेहन में हमेशा-हमेशा के लिए बसा दिया। आतंकवादियों ने 60 घंटों तक मुंबई को अपनी गिरफ्त में कर लिया। इस आतंकवादी घटना को हुए 12 साल पूरे हो चुके हैं,लेकिन आज भी यह घटना लोगों के जहन में छपी हुई है। 26/11 का दिन भारत के इतिहास का वो काला धन है जिसकी छाप शायद कभी नहीं छूट सकती। इस हमले में लगभग 160 लोगों ने अपनी जान गवाई। करीबन 300 लोग घायल हुए।

26/11 TERROR ATTACK

नजर डालते हैं घटना से जुड़े हर एक पहलू पर:-

कराची से नाव के रास्ते आए थे आतंकवादी माया नगरी में-


हमले के बाद हुई छानबीन में यह बात सामने आई थी कराची से नाव के रास्ते आए थे आतंकवादी। नाव में 10 आतंकवादी सवार थे। मुंबई पहुंचने से पहले उन्हें एक भारतीय नाव का सामना करना पड़ा। भारतीय नाव में सवार कुछ लोगों को वहीं पर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई, और बचे लोगों को अपने नाव पर बैठाल कर साथ ले आए। भारतीय लोगों का इस्तेमाल कर किनारे तक पहुंचे और फिर उन्हें भी खत्म कर दिया। छानबीन में इस बात की पुष्टि हुई कि तकरीबन 8 बजे आतंकवादी कोलाबा के पास मछली बाजार में पहुंचे थे। मछली बाजार में उतरने के बाद आतंकवादी चार अलग-अलग समूह में बट कर अपनी मंजिल की ओर निकल गए।

तफ्तीश से जांच करने के बाद यह बात सामने आई थी कि जिस मछली बाजार में आतंकवादी उतरे थे वहां की कुछ मछुआरों ने आतंकवादियों की आपाधापी को देखकर शक जताया था और पुलिस को इंतला किया था। परंतु उनकी शिकायत पर किसी भी अफसर ने तवज्जो नहीं दिया।

Mumbai terror attack has passed for 12 years.

ताज होटल के अलावा काफी जगह पर मचाया था कोहराम-

आतंकवादियों ने ताज होटल के अलावा काफी सारी जगहों पर हमले किए थे। शिवाजी टर्मिनल में जमकर चलाई थी बंदूक, मौका ए वारदात पर काफी लोगों ने तोड़ा था दम। शिवाजी टर्मिनल के बाद लियोपोल्ड कैफे में भी हुआ था हमला। वहां बैठे लोगों को इस बात का अंदाजा भी नहीं था की कुछ देर बाद वहा मौत का तांडव मचाने वाला है। विल पार्ले इलाके में भी एक टैक्सी को बम से उड़ा दिया गया था जिसमें टैक्सी ड्राइवर के साथ एक यात्री ने अपनी जान गवाई। बोरीबंदर में भी इसी तरह एक टैक्सी को बम से उड़ाया गया था वहां पर लगभग 3 जानें गई थी। नरीमन हाउस में रहने वाले लोग इस बात से अनजान थे कि उनकी जान भी खतरे में आने वाली है। ताज होटल से निकलने वाला धुआं मानो हमले की पहचान ही बन गया।

हमले के वक्त वीआईपी लोगों को गिरफ्त में करने की बनाई थी योजना

हमले के वक्त ताज होटल में लगभग 500 करीब लोग मौजूद थे। इन लोगों में कई Vip’s भी शामिल थे।आतंकवादी इस बात की रणनीति बनाकर आए थे कि ताज में ज्यादा से ज्यादा वीआईपी मेहमानों को गिरफ्त में लेना है। आतंकवादियों ने अपनी योजना के मुताबिक कुछ वीआईपी मेहमानों को अपनी गिरफ्त में कर लिया था। हालांकि सभी लोगों की जान बच गई थी।

60 घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आतंकवादियों को पकड़ा गया जिनमें से कुछ जीवित मिले और कुछ मृत।

कर्मवीर जिन्होंने अपनी जान गवा कर दूसरों की जान बचाई :-


सब इंस्पेक्टर तुकाराम ओंबले
मेजर संदीप उन्नीकृष्णन
हेमंत करकरे
गजेंद्र सिंह
पुलिस इंस्पेक्टर विजय सलास्कर
एडिशनल कमिश्नर अशोक कामटे
श्री शशांक शैंदे पुलिस इंस्पेक्टर
मुकेश जी जाधव होमगार्ड कॉन्स्टेबल
श्री बापूसाहेब दुरूगडे पुलिस सब इंस्पेक्टर
श्री बाला साहेब भोसले असिस्टेंट पुलिस सब इंस्पेक्टर
श्रीप्रकाश मोरे सब इंस्पेक्टर
श्री अरुण चिति पुलिस इंस्पेक्टर
श्री राहुल एस शिंदे पुलिस कॉन्स्टेबल
अंबादास पवार पुलिस कांस्टेबल
श्री जयंत पाटील पुलिस कांस्टेबल
योगेश पाटिल पुलिस कांस्टेबल
श्री राम जी चौधरी हेड कांस्टेबल

इनके साथ ना जाने ऐसे कितने लोग थे जिन्होंने अपनी जान गवा कर दूसरों की जान बचाई।कुछ ऐसे लोग थे जिन्हें अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल करके काफी लोगों की जान बचाई। हमारा देश और देश वासी ऐसे महान लोगों के कर्ज को शायद ही कभी चुका पाए।