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IAS Success Story: पिता और भाई को खोने के बावजूद भी 22 साल की उम्र में आईएएस ऑफिसर बने हिमांशु

himanshu nagpal

हरियाणा राज्य के एक छोटे से गांव के रहने वाले हिमांशु आईएएस ऑफिसर बन गए हैं।
गुना गांव के हिमांशु नागपाल ने यूपीएससी सीएसई परीक्षा 2018 में दी थी। पहले ही प्रयास में उन्होंने 26 वां रैंक हासिल किया। इस परीक्षा में टॉप कर उनका सपना पूरा हो गया। इसी बीच उनकी जिंदगी में कई सारे मुश्किल वक्त भी आए।

आइए जानते हैं आज उनकी सक्सेस स्टोरी।

कभी हार नहीं मानी


कई कैंडीडेट्स जो यूपीएससी परीक्षा पास करते हैं, उनकी जिंदगी संघर्ष भरी होती है। कई कैंडीडेट्स के जीवन में संघर्ष केवल पढ़ाई का नहीं होता। तैयारी से संबंधित समस्याएं और कई तरह के लॉस भी होते हैं। भले ही जीवन में कितनी ही बड़ी मुश्किल क्यों ना हो वह कभी हार नहीं मानते। हिमांशु नागपाल भी ऐसे ही जज्बे के साथ आज सिविल सर्विस में कामयाब हो पाए हैं। उनकी कहानी भी दर्द भरी है। इनके लिए सिविल सर्विस कंपल्शन थी, ना कि एक विकल्प या चॉइस। उन्होंने पूरे मन से इस चैलेंज को पूरा करने की ठानी। इस सफर में वह पहले प्रयास में सफल भी हुए।

हिमांशु नागपाल ने अपने यूपीएससी से संबंधित सारी बातों की चर्चा दिल्ली नॉलेज ट्रैक के इंटरव्यू में की है।
आइए विस्तार से जानते हैं।

पढ़ाई में रहे अव्वल


हिसार, हरियाणा के छोटे से गांव भूना में जन्मे हिमांशु नागपाल। यहीं पर पले-बढ़े और शुरुआती पढ़ाई भी यहीं हुई। पांचवी कक्षा तक गांव के ही एक हिंदी मीडियम स्कूल से अपनी पढ़ाई की। 12वीं तक उन्होंने हिंदी मीडियम स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। किंतु पांचवी के बाद आगे की पढ़ाई के लिए हांसी चले गए थे। पढ़ाई में तो वे अच्छे थे ही।

10वीं और 12वीं में उन्होंने टॉप किया था। यहां तक के सफर में उनकी जिंदगी में सिविल सर्विस का कोई स्थान नहीं था।

पिता को खो दिया


12वीं के बाद इन्होंने दिल्ली का रुख किया। वहां हंसराज कॉलेज में कॉमर्स स्ट्रीम में एडमिशन दिया। दिल्ली में छोड़ने के लिए उनके पिता हाथ आए थे दोनों ही कॉलेज में बैठे थे और वहां रखे एक बोर्ड को देखकर हिमांशु के पिता ने उनसे कहा कि मैं तुम्हारा नाम इस बोर्ड पर देखना चाहता हूं। जब वापस लौट रहे थे तो उनकी मृत्यु हो गई।

यहां से उनकी जिंदगी में काफी मुश्किलें भी आई। पिता के द्वारा कहे गए अंतिम शब्द उनके जीवन का मकसद बन गया।

कॉलेज में हुई खूब हंसाई


गांव से आने वाले हिमांशु को कॉलेजों में काफी परेशानी हुई। इंग्लिश बोलनी आती थी और ना ही शहरी बच्चों की तरह सलीकेदार हैं। ऐसे में दूसरे बच्चों को देखकर इन्हें मन में अक्सर हीन भावना आती थी। इसी कारण में क्लास के कोने में छुप कर बैठे रहते थे। खुद शर्म आती थी कि दूसरे बच्चे फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते थे।इन सब के बावजूद हिमांशु ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और कभी भी इस पर आंच नहीं आने दी। अपने आप को नए मोबाइल में डालने की कोशिश की और खुद को बदला भी।

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भाई की हो गई मौत


अभी हिमांशु नागपाल अपने पिता की मौत के सदमे से बाहर नहीं आए थे तभी उनके पास अपने भाई की मृत्यु की खबर आई। यह सुनते ही उन्हें लगा कि पढ़ाई छोड़ कर अपनी मां के पास जाना होगा। ऐसी स्थिति में उनके चाचा ने उन्हें समझाया। उन्होंने कहा कि वे मां की चिंता ना करें और पढ़ाई जारी रखें। उनके लिए यही से सिविल सर्विस एक विकल्प नहीं, कंपल्शन बन गया। उन्होंने मन में ठान लिया था कि किसी भी हाल में उन्हें या परीक्षा पास करनी है। इसके लिए उन्होंने काफी मेहनत की। इस दौरान उनके चाचा ने भी उन्हें सपोर्ट किया।

आम अंतर नहीं था पता

HImanshu nagpal success story
HIMANSHU NAGPAL


हिमांशु दूसरे कैंडिडेट को बताते हैं कि उन्हें एमपी और एमएलए में फर्क तक नहीं पता था। उन्होंने बताया कि उनसे यह सवाल क्लास में पूछा गया था। जवाब ना देने पर सब उनके ऊपर हंसे थे। यह बताने का उनका उद्देश्य यह था कि जरूरी नहीं सिविल सर्विस में आने वाले सभी कैंडिडेट्स शुरुआत से ही ब्रिलियंट हों। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि ग्रेजुएशन बताएं सबसे अहम होता है। इसमें खुद को निखारने का और तैयारी करने का काम बहुत ही उम्दे तरीके से कर सकता है।

यूपीएससी कैंडिडेट्स को सलाह

दूसरे सभी यूपीएससी कैंडिडेट को सलाह देते हुए हिमांशु कहते हैं कि

  • अपने बैकग्राउंड को कभी कम मत समझना।
  • भाषा कोई भी हो, फ़र्क इससे पड़ता है कि आप अपनी बात कैसे रखते हैं।
  • हिंदी या इंग्लिश से कोई फर्क नहीं पड़ता।
  • मोटिवेशन हार्ड वर्क और एक सही डायरेक्शन परीक्षा में सफल जरूर बनाते हैं।
  • भले ही आप का प्रयास धीमी गति का हो लेकिन रोज होना चाहिए।
  • फैमिली फंक्शन या फेस्टिवल क्यों ना हो,पढ़ाई का रूटीन बिगड़ने नहीं रहना चाहिए.
  • आपकी स्ट्रेंथ और वीकनेस आपसे ज्यादा और कोई नहीं जानता।
  • किसी भी परेशानी से उबरने का तरीका सबसे बेहतर आपके पास है।
  • कोई मलाल ना रखें और प्रयास करते जाएं.
https://www.youtube.com/watch?v=VcGDuMnI0HU

https://www.liveakhbar.in/2020/11/pfizer-vaccine-trials-90-successful.html
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