वर्ल्ड फूड प्रोग्राम- शांति का प्रतीक

Rahul Raj -Live Akhbar Desk

88 देशों में 9.7 करोड़ लोगो तक एक साल में वर्ल्ड फूड प्रोग्राम तक अन्न के रूप में मदद पहुंचाई जिसके कारण इस प्रोग्राम को 2020 की शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया है।इसकी सूचना नॉर्वे के नोबेल कमेटी के अध्यक्ष बरित राइज ने दी और कहा कि यह पूरी प्रोग्राम के टीम के लिए बहुत बड़ी उपलबधि है और वे बहुत गौरवानवित महसूस कर रहे है ।और तो और यह पहली बार है कि शांति के नोबेल पुस्कार को किसी संस्था या व्यक्ति को नहीं बल्कि एक प्रोग्राम को चुना गया ।इस प्रोग्राम से जुड़े हर एक व्यक्ति का यही कहना है कि उनके काम को अब पूरी दुनिया में एक पहचान मिली जिससे उन्हें काफी खुशी होती है।उन्होंने यह भी कहा कि उनके वजह से हज़ारों का पर भर रहा है और यही वजह उन्हें सुकून देती है और उनके जीवन का लक्ष्य पूरा हो रहा है।

वर्ल्ड फूड प्रोग्राम की अद्भुत उपलब्धियां –

कुछ रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र का यह प्रोग्राम प्राकृतिक आपदा एवम् अकाल या महामारी जैसी स्थिति में जरूरतमंदो को खाना उपलब्ध करवाता है ।इसकी शुरुवात 1961 में हुई थी जिसके पीछे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट डी के सुझाव की भूमिका थी।जब हाल में ही ईरान में भूकंप ने काफी तबाही मचाई थी तब वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने 1500 मैट्रिक टन गेहूं ,270 तन चीनी 27 टन चाय भेजी थाईलैंड में तूफान के समय और अल्जीरिया में युद्ध के समय भी इन्होंने काफी मदद की। 1963 में इस प्रोग्राम का सबसे पहला स्कूल मीट हुई और 1965 में यह संयुक्त राष्ट्र का प्रोग्राम बन गया।

वर्ल्ड फूड प्रोग्राम – मानवता की ढाल

आज के इस महामारी एवम् प्राकृतिक प्रकोप के दौर में वर्ल्ड फूड प्रोग्राम मानवता कि ढाल बनकर उभरी है।इस प्रोग्राम के अन्तर्गत अनगिनत लोगो के पेट कि आग बुझी है और जिन्होंने इस अकाल के समय बहुत कुछ सहा उनके लिए भी इस प्रोग्राम एक मरहम के रूप में उभरा है।आज इस प्रोग्राम के पास 5600 ट्रक,30 जहाज और 100 विमान है जिनकी ऐसी आपदा में काफी मदद ली जाती है।यह प्रोग्राम आज के समय में हर रोज़ 1500 डिलीवरी करता है पूरी दुनिया में।इस प्रोग्राम का मुख्यालय इटली में है और अभी यहां 1700 कर्मचारी कार्यरत है।

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