चन्द्रमा की सतह पर मिला पानी : इन्सानी बस्तियां बसाने की उम्मीदें हुई और मजबूत

Live Akhbar Desk-Jayasi Upamanyu

वॉशिंगटन। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने स्ट्रेटोस्फीयर ऑब्जरवेटरी फॉर इंफ्रारेड एस्ट्रोनॉमी (SOFIA) की सहायता से चन्द्रमा की सतह पर पानी ढूंढ निकाला है। बड़ी बात तो यह है कि पानी चन्द्रमा की जिस सतह पर सूरज की किरणें पड़ती हैं उस सतह पर मिला है। इससे चन्द्रमा पर जीवन की उम्मीदों को और मजबूती मिली और सिर्फ जीवन ही नहीं ये पानी पीने और रॉकेट ईंधन उत्पादन के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता ह

सोफिया की सहायता से ये पानी चन्द्रमा के दक्षिणी गोलार्थ में स्थित, सबसे बड़े गड्ढों में से एक क्लेवियस क्रेटर जो कि पृथ्वी से दिखता है, उसमे पानी के आडू (H2O) का पता चला है। इससे पहले भी हुए कई अध्ययनों में हाइड्रोजन के कुछ रूप का पता चला था। लेकिन H2O और पहले पाए गए हाइड्रोजन के रूप OH में फर्क करने में वैज्ञानिक असफल रहे।

नेचर एस्ट्रोनॉमी के अंक में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, इस स्थान से 100 से 412 पार्ट प्रति मिलियन की सांद्रता में पानी का पता चला है। अगर तुलनात्मक रूप में बात करे तो सोफिया के द्वारा खोजे हुए पानी की मात्रा सहारा डेजर्ट के मौजूदा पानी से 100 गुना कम है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि चन्द्रमा की इतनी कठोर और वायुहीन सतह पर पानी कैसे बनता है और कैसे बना रहता है।

नासा की योजना चांद पर इन्सानी बस्तियां बसाने की है। जिसके लिए नासा ने आर्टेमिस प्रोग्राम के ज़रिए 2024 तक मानव मिशन, चन्द्रमा की सतह पर भेजने की तैयारी है। इसी के ज़रिए 2024 तक इन्सानों को चांद की सतह तक पहुंचाने की कोशिश जारी है।

नासा के हैडक्वार्टर में विज्ञान मिशन निदेशालय में एस्ट्रोफिजिक्स डिवीजन के निदेशक पॉल हर्ट्ज ने कहा कि “हमारे पास पहले से संकेत थे कि H2O जिसे हम पानी कहते हैं वह चन्द्रमा के सतह जहां पर सूर्य की किरणे पड़ती हैं वहां मौजूद है। इससे हमें और गहरी अंतरिक्ष खोज करने की प्रेरणा मिली।”

                               

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *