Vijayadashami 2020: जानें विजय मुहूर्त, तारीख और सिंदूर खेला के बारे में

Vijayadashami 2020

Jaysi Upamanyu- Liveakhbar Desk

विजयादशमी को दशहरा भी कहा जाता है। दशहरा हिन्दुओं के बड़े त्योहारों में से एक है। यह बुराई पर अच्छाई का प्रतीक हैं। इस भगवान श्री राम ने लंका के राजा दशानन (रावण) का वध कर अयोध्या के लिए प्रस्थान किया था। रावण को दशानन भी कहा जाता है क्योंकि उसके दस सिर थे इसलिए इस पर्व का नाम दशहरा पड़ा। यह त्यौहार अश्विन माह की नवरात्रि के तुरंत बाद आने वाली दशमी को मनाया जाता है। इस दिन को शस्त्र पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन को शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है क्योंकि इसी दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर दैत्य का वध किया था। इसी दिन सक्रात्मक शक्तियों ने नकारात्मक शक्तियों पर विजय प्राप्त करी थी।

शुभ मुहूर्त और तारीख

पूरे देश में दशहरे के पर्व को धूम धाम से मनाया जाता है। लेकिन इस वर्ष कुछ लोग इसे 25 अक्टूबर को और कुछ 26 अक्टूबर को माना रहे हैं। तो सही मुहूर्त क्या है वो आपको बताते हैं।

दरअसल, ज्योतिषियों जा कहना है कि पंचांग के अनुसार 25 अक्टूबर को ही दशहरे के पर्व को मानना चाहिए। क्योंकि इस दिन दशमी तिथि में अपराह्न काल और विजय मुहूर्त दोनो का संयोग बन रहा है। और 26 अक्टूबर को दशमी सूर्यौदय के समय तक ही रहेगी तो इस दिन मूर्ति विसर्जन कर सकते हैं।

विजयादशमी के मुहूर्त :– दोपहर 1.57 से 2.42 तक (25, अक्टूबर, 2020)।

बंगाल की विजयादशमी की तारीख :- सोमवार, 26 अक्टूबर।

दुर्गा विसर्जन का मुहूर्त :- सुबह 6.29 से 8.43 तक (26, अक्टूबर, 2020)।

क्या है सिंदूर खेला?

बंगाल की दुर्गा पूजा देश में ही नहीं पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। और इस समय भी बंगाल में दुर्गा पूजा बहुत ही जोर शोर से मनाई जा रही है। इस समय बंगाल में बहुत सी परंपरागत रस्में होती है जैसे सन्धि पूजो, धनुचि डांस, इनमें से ही एक है सिंदूर खेला।
दरअसल, यह रस्म दशमी के दिन की जाति है। ये रस्म देवी दुर्गा की विदाई से पहले की जाति है। एक तरह से ये देवी की विदाई होती है। इसमें बंगाली महिलाएं लाल रंग के सिंदूर के साथ खेलती हैं और एक दूसरे को भी लगाती हैं।
विसर्जन पूजा के बाद देवी बोरों की रस्म होती है। जिसमे बंगाल की शादीशुदा महिलाएं सफेद और लाल रंग की जो परंपरागत सारी होती है बंगाल की उसे पहन कर दुर्गा आरती करती हैं और फिर मां के सिर और पैरों में सिंदूर लगाती हैं।
सिंदूर खेला एक तरह से शक्ति का प्रतीक है। जो नारी के नारीत्व को उजागर करता है और महिलाएं अपने पति और परिवार की लंबी उमर की कामना करती हैं।

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