जी.डी.पी में गिरावट का अनुमान भारत के लिए क्यों चिंता का सबब??

Live Akhbar Desk-Tanisha Jain

भारत के प्रधानमंत्री ‌‌‍श्री नरेंद्र मोदी ने भारतवासियों को एक सपना दिखाया , साल 2024-25 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5‌ लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर यानि पांच टि्लियन डॉलर की हो जाएगी । भारतवासियों को मंगलवार को अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानि आई एम एफ ने बताया कि भारत की जी.डी.पी इस साल -10.3 % जा सकती है। मंगलवार को इसका एलान करते हुए आई.एम.एफ ने इसकी वजह कोरोना महामारी और इसके चलते सम्पूर्ण लाॅकडाउन‌‌ को बताया है इसकी पहली रिपोर्ट में (जून में) आई.एम.एफ ने भारत की जी.डी.पी का -4.5% तक जाने का अनुमान लगाया था। लेकिन हाल ही में आईं रिपोर्ट में आंकड़ों को संशोधित कर के -4.5 %से -10.3% कर दिया । विकासशील अर्थव्यवस्थाओ की सुची में भारत की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है। भारत से ज्यादा बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अमेरिका के बारे में अनुमान है है 2020 में यहां की जी‌.डी.पी -4.5% तक जा सकती है। जी.डी.पी में गिरावट होने के कारण असली मुश्किलो का सामना उन लोगों को करना होगा जो रोज कमाते हैं और खर्च करते हैं, यानि जिनके पास बचत के नाम पर कुछ भी नहीं होता । आमदनी और खर्च के अलावा इसका असर निवेश पर भी पड़ेगा । नए रोजगार बढ़ने की संभावना कम है। रोजगार न बढ़ने की वजह से युवाओं को काफी हद तक मुश्किलों से गुजरना होगा। आई.एम.एफ की इस रिपोर्ट के मुताबिक आम लोगों की आमदनी कम होगी जिससे वे खर्च भी कम करगे । न्यू इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, पांच टि्लियन डॉलर इकोनॉमी जैसे कई सपने भारत के प्रधानमंत्री ‌‌‍श्री नरेंद्र मोदी जी ने देश वासियों को दिखाये थे । इन सपनों को साकार करने की समय सीमा बढ़ाकर 2029-30 तक करने की बातें सामने आ रही है, जिसको मध्य नजर रखते हुए भारत इन सपनों को साकार करने में अभी काफी हद तक दूर है। साल की पहली तिमाही में 23.9% की गिरावट दर्ज की गई थी, भारत के इतिहास में करीब 40 साल बाद अब तक की सबसे खराब वृद्धि दर देखने को मिला। सरकार के दिखाएं गए सपने को पूरा करने के लिए न केवल गो्थ रेट को बढाना होगा , बल्कि उसे बरकरार रखना होगा । देश को विकास की ओर ले जाने वाले मार्ग में में कोरोना वायरस नामक एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा जिसके कारण विकास तक पहुंचने में लम्बा इंतजार भी देशवासियों को करना पड़ सकता है।

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