January 26, 2021

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दशहरा 2020 : कोरोना काल में इन स्थानों पर सर्वश्रेष्ठ रावण दहन

Live Akhbar Desk-Tanisha Jain

दशहरा का पावन पर्व पूरे भारतवर्ष में रीति-रिवाज के बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार भारतीय संस्कृति के शौर्य का उपासक हैं। अश्विन शुक्ल दशमी को मनाया जाने वाला दशहरा हिन्दूओं का एक मुख्य त्यौहार है। असत्य पर सत्य की विजय है दशहरा। इस दिन श्री राम ने रावण का वध किया था और विजय प्राप्त की थी इसलिए इसे विजयदशमी भी कहा जाता है। दशहरा का पर्व पापों, अहंकार, अवगुणों को छोड़ने की प्ररेणा देता है।

यह त्यौहार नवरात्रि के दसवें दिन मनाया जाता है, पूरे देश में इस त्यौहार को अलग अलग तरीके से मनाया जाता है। कुछ जगहों पर रावण दहन किया जाता है, तो कुछ जगहों पर पूजा , कुछ का कहना है कि रावण बुराई का प्रतीक है।तो कुछ का कहना है कि रावण से बड़ा शिव भक्त कोई नहीं। भारत के अधिकांश क्षेत्रों में रावण दहन किया जाता है। सभी भारतीय अपनी-अपनी परम्परा, मान्यता के अनुसार इस त्यौहार को मनाते हैं।

आए रूख करते हैं कुछ खास जगह पर जहां सर्वश्रेष्ठ दहन किया गया –

नई दिल्ली में बेहद सामान्य तरीके से मनाया गया दशहरा कोरोना के चलते इस साल पहले जैसी धूमधाम नहीं दिखी पहले के मुकाबले बेहद कम जगह दी गई दहन की अनुमति , सरकार द्वारा जारी किए गए गाइडलाइन के तहत खाघ पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध।

मेरठ में चुंगी रामलीला मैदान में रावण दहन किया गया, इस अवसर पर लोगों ने काफी मात्रा में लोग रामलीला मैदान में आए और इस त्यौहार का आनंद लिया।

देहरादून में एक बड़े मैदान में रावण वध का मंचन किया गया, मंचन के कार्यक्रम देखने के लिए लोगों ने काफी मात्रा में शामिल हुए मंचन के बाद रावण दहन का भी आनंद उठाया।

चंडीगढ़ , मोहली , पंचकूला में भी कोरोना के चलते दशहरे का त्यौहार का आनंद लिया लोगों ने यहां पर भी रावण मंचन का कार्यक्रम आयोजित किया गया,त्तपश्चात रावण दहन हुआ।

अगरा के कैंट रेलवे इंस्टीट्यूट पर रावण के समान पुतला बनाया गया था , जिसका दहन देखने के लिए क्षेत्रीय लोग‌ पहुंचे मास्क और शोसल डिस्टेंसिग का रखा ध्यान।

मुजफ्फरनगर जिले में लोगो ने बुराई पर अच्छाई की जीत दर्शाने के लिए किया कोरोना वायरस के पुतले का दहन किया गया। जिला मैदान में रावण के साथ मेघनाद, कुम्भकरण के साथ कोरोना के पुतले का दहन हुआ।
आयोजन सादगी से समाप्त किया गया।

कोरोना के कारण पुतले ज्यादा बड़े नहीं बनाए गए , सरकार द्वारा जारी किए गए गाइडलाइन का पालन किया गया।