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पुष्पम प्रिया चौधरी,क्या विश्वास जताएंगे बिहारी?

Garima

बिहार राज्य में चुनाव होने वाले हैं और इसी कारण चुनावी माहौल में जबरदस्त महाभारत मची हुई है। जहां विस्थापित पार्टियां एड़ी- चोटी का ज़ोर लगा रही हैं वहीं उनको चुनौती देने के लिए मैदान में अब पुष्पम प्रिया चौधरी की प्लूरल्स पार्टी भी उतर चुकी है। प्रिया सीएम उम्मीदवार होने का दावा करती हैं और वह कह रही हैं कि बिहार में आर्थिक विकास के लिए उनके पास कई योजनाएं हैं।

कब उतरी मैदान में?

मार्च महीने में अचानक अखबारों के पन्नों पर प्रिया और उनकी पार्टी की बड़ी से फोटो छापी गई। बकायदा इश्तेहार भी छापे गए गए और प्रचार गाड़ियों के जरिए भी बिहार के लोगों तक उनकी विचारधारा को पहुंचाया गया। आज लगभग हर घर में यह एक जानी-मानी नेता हैं। पुष्पम बिहार की राजनीति बदलने का दावा करती है और साथ ही यह भी कह रही हैं कि वो बिहार को आगे लेकर आएंगी।

पार्टी में क्या है खास?

पुष्पम ने बताया कि उन्होंने अपनी पार्टी का नाम ‘ प्लूरल्स’ रखा है। उनका मानना है कि इस शब्द की बिहार को काफी ज़रूरत है। प्रचार-प्रसार के दौरान उनके बैनर पर पार्टी के नाम के नीचे ‘लव बिहार,हेट पॉलिटिक्स’ लिखा हुआ है। पार्टी का लोगो एक सफेद घोड़ा है जिस पर पंख लगे हुए हैं। इसे तीव्रता और शक्ति का प्रतीक माना गया है।’जन गण सबका शासन’; प्रिया की पार्टी का नारा है। प्लूरल्स पार्टी ने 40 उम्मीदवारों की एक सूची जारी की है जिसमें जाति की जगह उनके व्यवसाय और मजहब की जगह ‘बिहारी’ लिखा गया है।

अलग है विचारधारा

पुष्पम का कहना है कि जहां चुनाव में जाति के आधार पर नेता वोट मांगते हैं, हम ऐसा बिल्कुल नहीं करेंगे और बिहार के विकास के लिए हर वह प्रयास करेंगे जो हमसे हो पाएगा। उनका मानना है कि पिछले 30 वर्षों में लोगों ने जिन्हें सोशल जस्टिस के लिए वोट दिया, वह सभी केवल राजधानी में बैठकर विचार करते रह जाते हैं। वह कहती हैं कि आज तक ऐसा कोई नहीं आया जिसे बिहार के विकास को लेकर कोई ज्ञान हो। वे सभी केवल राजनीति को अपने करियर की नजर से देखते हैं। अपनी बातों को रखते हुए उन्होंने बताया कि कई ऐसे नेता है जो जब वोट मांगने जाते हैं तो वह लोगों के डर को इस्तेमाल कर उनका मत हासिल करते हैं। जनता को यह पता है कि ईवीएम सिस्टम द्वारा दिए गए वोट कभी भी किसी को पता नहीं चल पाते लेकिन फिर भी उन्हें यह लगता है कि अगर उस नेता को यह बात पता चल गई तो वह उनका क्या हाल करेंगे। प्रिया चौधरी चाहती हैं कि यह डर लोगों के मन से हट जाए। वह कृषि क्षेत्र में अहम बदलाव लाने के लिए कई कदम उठाने की बात कहती हैं। कैश क्रॉप्स, कोल्ड स्टोरेज के साथ-साथ मार्केट लिंकेज की सुविधा मुहैया कराना चाहती हैं। बाढ़ से हर साल 70 लाख लोग प्रभावित होते हैं इसलिए इस आपदा से निजात पाने के लिए प्रिया एक अच्छे कना, इरिगेशन और ड्रेनेज सिस्टम को बढ़ावा देना चाहती हैं। पितृसत्ता समाज को खत्म कर वह सभी वर्गों को बराबर का मौका देने का वादा भी करती हैं।

लंदन से की पढ़ाई:

पुष्पम प्रिया चौधरी जदयू नेता विनोद चौधरी की बेटी हैं और मूल रूप से दरभंगा से ताल्लुक रखती हैं। लंदन से उन्होंने इंग्लैंड के इंस्टीट्यूट आफ डेवलपमेंट स्टडीज विश्वविद्यालय से एमए इन डेवलपमेंट स्टडीज और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स एंड पॉलीटिकल साइंस से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए किया है। अपने पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि बचपन में उन्हें घर से बाहर ज्यादा नहीं निकलने दिया जाता था लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ी होती गई उन्हें सारी समस्याएं समझ में आने लगी और इन्हीं सब वजहों के चलते वह अब राजनीति में अपने कदम रख चुकी हैं।

क्यों हमेशा काले लिबास में दिखती हैं?

प्रिया चौधरी से जब यह सवाल पूछा गया तब उन्होंने कहा कि ज्यादातर नेता सफेद कपड़े पहनते हैं, इसके पीछे क्या कारण है? संविधान में किसी भी राजनेता के लिए कोई ड्रेस कोड तय नहीं किया गया है, ऐसे में जिसकी जो मर्जी हो वह वो कपड़े पहन सकता है।

अब आगे देखना यह है कि बिहार की जनता पुष्पम प्रिया चौधरी और उनकी पार्टी पर कितना विश्वास दिखाती है।

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