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410वां मैसूरू दशहरा उत्सव-जानिए पूरी जानकारी

Live Akhbar Desk–Rahul Raj


मैसूरू में हर साल दशहरा पर होने वाली उत्सव की धूम अब फिर सर चड़ कर बोल रही है।पर साथ ही साथ इस कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए भी इस उत्सव के रूप रेखा में बदलाव किया गया है।इस उत्सव के खूब चर्चित एवम् मनोरंजक आयोजन जंबो सवारी में अब 12 की बजाय 5 हाथियों को ही शामिल किया है।इस बार भी पूरी पारंपरिक तरीके से ही यह उत्सव मनाया जाएगा ,पूरे शहर को भी जगमग किया जाएगा परन्तु इस बार जनता को इसमें शिरकत करने नहीं दिया जाएगा।मैसूरू महल से यह जुलूस का आग़ाज़ होगा जो कि 5 किमी दूर बनिमंतम तक ही सीमित रह जाएगी।उत्सव में सरकार ने लोगो को वर्चुअली जोड़ने की योजना भी बनाई है।राज्य सरकार ने इस उत्सव का बजट 50 करोड़ से घटाकर 10 करोड़ कर दिया है।इस साल उत्सव का सुभारंभ कोरोना वॉरियर डॉक्टर मंजूनाथ करेंगे।

उत्सव का इतिहास-


इस उत्सव का इतिहास बहुत ही खास एवम् काफी पुराना है।इस जूलूस में हाथियों के ऊपर 750 किलोग्राम सोने के हौदे में देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा की स्वर्ण मूर्ति रखी जाती है।इस जुलूस में साथ ही साथ म्यूजिक बैंड , सांस्कृतिक कार्यक्रम ,हाथी, घोड़े,उट साथ साथ चलते हैं।इस mahatutsav के अलौकिक लुफ्त उठाने के लिए 4 लाख हर साल आते हैं। साथ ही 1200 कलाकार इस उत्सव में अपने हुनर का प्रदर्शन करते हैं।3000 से भी ज़्यादा वीआईपी पास जारी किए जाते हैं।

उत्सव में कोरोना की खलल-


हर साल इस भी भारी मात्रा में पर्यक्तो की भीड़ उमड़ने की उम्मीद थी परंतु कोरोना के कारण मैसूरू के अधिकतर होटल 5 महीने से बंद पड़े हैं।हर साल यहां 1.5 लोगो का सैलाब आता था जिसके कारण बहुत लोगों के व्यापार को बढ़ावा मिलता था।हर साल 50 करोड़ का व्यापार तो होता ही था परन्तु इस साल 10-15 लाख के है आसार दिख रहे है। इंफोसिस जैसे आईटी कंपनी फॉरेन डेलिगेशन बुलवाती थी।यह के लोग तो बड़े बेसब्री से इस उत्सव का इंतजार करते है परन्तु इस बार इस उल्लास में खलल तो ज़रूर पड़ेगी मगर भी बाज़ार में उत्साह ज़िंदा है और उन्होंने हार नहीं मानी है।

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