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गुजरात में 25% स्कूल फीस माफ, जानिए अन्य राज्यों में क्या है स्थिति?

LIVEAKHBAR DESK: Garima

कोरोनावायरस ने हमारे जीने के सलीके को बदल के ही रख दिया और शिक्षा व अर्थव्यवस्था के क्षेत्र को भी क्षति ग्रस्त किया है। देश को लॉकडाउन जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में अभिभावकों के लिए स्कूल फीस भरना मुश्किल साबित हो रहा है। इसे चिंता के बीच गुजरात के पैरेंट्स के लिए राहत भरी खबर आई है। गुजरात सरकार ने ऐलान किया है कि वह स्कूल फीस 25% माफ कर देगी।

अभिभावकों का अनुरोध:

गुजरात सरकार ने पेरेंट्स के अनुरोध पर विचार करते हुए यह कदम उठाया है। गुजरात के शिक्षा मंत्री भूपेंद्र सिंह चूड़ासामा ने यह महत्वपूर्ण ऐलान कर फीस माफी का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। स्कूल मैनेजमेंट और अभिभावकों के साथ बातचीत के बाद गुजरात सरकार ने यह फैसला लिया है। निर्देश के तौर पर स्कूलों को कहा गया है कि वह बच्चों से स्पोर्ट्स, कैंटीन, ट्रांसपोर्टेशन और कंप्यूटर क्लास की फीस भी वसूल नहीं कर सकते और ना ही कोई दवा दबाव बना सकते हैं। शिक्षा विभाग ने सारे स्कूलों को सख्त हिदायतें दी हैं।

दिल्ली में क्या है हाल?

दिल्ली सरकार के आदेश के बावजूद वहां स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। बीते महीने 11 सितंबर को ही ऐलान कर यह कहा गया था कि कोई भी स्कूल कोरोना महामारी के दौरान स्कूल फीस में वृद्धि नहीं कर सकता। साथ ही दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने यह भी कहा है कि जो भी स्कूल इन आदेशों का पालन नहीं करेगा उन पर सख्त कार्यवाही भी की जा सकती है। इसके बावजूद अभिभावकों ने कई नामी निजी स्कूलों के खिलाफ वृद्धि को लेकर शिकायत दर्ज़ कराई है।

पंजाब-हरियाणा:

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए आदेश जारी किया है जिसमें यह कहा गया है कि केवल वही स्कूल जो ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं वही ट्यूशन फीस ले सकते हैं। स्थायी या कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त शिक्षक और कर्मचारियों को ध्यान में रखकर न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और हरिंदर सिंह सिद्धू की खंडपीठ ने कहा कि वे सभी उसे नियमित वेतन का हक रखते हैं जो लॉकडाउन से पहले उन्हें मिल रहा था।

बिहार में अभिभावकों की नाराज़गी:

बिहार राज्य में मार्च और अप्रैल महीनों से ही स्कूल की मनमानी फीस की शिकायतें आ रही हैं। सरकार और हाईकोर्ट दोनों ने सख्त दिशानिर्देश जारी किए थे लेकिन फिर भी ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं स्कूल ट्यूशन फीस के साथ अन्य चीजों के भी चार्ज मांग रहे हैं। भागलपुर में अभिभावकों ने एक स्कूल के खिलाफ पैदल मार्च भी किया था।

ओडिशा में हाई कोर्ट का निर्देश:

उड़ीसा में 30 सितंबर को स्कूल फीस को लेकर सुनवाई हुई। जब यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट के सख्त आदेश पर शिक्षक संघ, अभिभावक संघ और स्कूल संघ के कार्यकर्ताओं को लेकर एक बैठक हुई थी। इसके बाद फैसला के रूप में फीस स्लैब पेश किया गया जिसके अनुसार कुछ स्कूल कम से कम 7.5 पीस दी जबकि अन्य कुछ स्कूल 26 फ़ीसदी तक स्कूल फीस माफ कर सकेंगे।

वहीं दूसरी ओर स्कूलों का कहना है कि कोरोनावायरस जैसी वैश्विक महामारी के दौरान उनके शिक्षक ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं और ऐसे में स्कूल फीस में ज्यादा कटौती नहीं की जा सकती।

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