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विदेशी निवेश की आड़ में लोकतंत्र की हत्या

Rahul Raj- Liveakhbar Desk

इंडोनेशिया के युवाओं एवम् कामकारो में आक्रोश और विद्रोह की लहर दौड़ रही है।जैसे ही वह की सरकार ने नए रोजगार बिल कि पेशकश कर उससे पास भी कर दिया मानो पूरे इंडोनेशिया में बाघी हरकतों ने वह के लोगो के दिल और दिमाग में जगह बना ली।एक तरफ जहां कॉलेज एवम् रोजगार पाने वाले छात्रों ने जमकर सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया वहीं कई कामगार लोग हर्टल पर चले गए और कहीं कहीं विद्रोह इतने हिंसक हो गए की सुरक्षा कर्मियों को बल प्रयोग करना पड़ा और साथ ही साथ आंसू गेज के होल भी छोड़े गए।कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर उंपर करवाई भी की गई और बाद में उनसे हथाहत की भरपाई के लिए ईनामी राशि भी चुकानी पड़ी।

कैसा है बिल – लोकतंत्र के हित या उसके खिलाफ़

इंडोनेशिया के रोजगार बिल में पूरे 79 सालो बाद बदलाव किया गया है।इंडोनेशिया में संसद की प्रतिनिधि में यह बिल पास हुआ है जिसका नाम उसके मूल आधार पर रखा गया है – ” न्यू जॉब क्रिएशन” ।इसके तहत इंडोनेशिया के बाज़ार में विदेशी निवेश को मुख्यता रूप से जोड़ा जाएगा जिससे उनकी अर्थव्यवस्था की बुनियाद और मजबूत होगी।यह बिल के अन्तर्गत सरकार ने यह भी प्रावधान लागू किया की अब कर्मचारियों को वेतन उनके मासिक काम के बजाय उनके काम करने के घंटो के आधार पर मिलेगा जिससे काम कि नियति एवम् प्रावधान की नींव आगे बढ़ेगी ।

क्यों बढ़ रहा है लोगो का आक्रोश?

इस बिल के ख़िलाफ़ इतना हिंसक एवम् बाघी व्यवहार आखिर क्यूं लोगो के ज़हन में है? इस सवाल के जवाब के बाद तक जाया जाए तो लोगो का कहना की सरकार विदेशी निवेश एवम् सतत विकास के नाम पर भ्रष्टाचार कर रही है।लोगो का यह भी कहना है कि इस बिल के पास होने पर कई लोगो से उनका काम छीन जाएगा एवम् बहुत लोगो की तो नौकरी भी का सकती है क्यूंकि अगर कोई व्यक्ति बीमार है या काम करने की स्तिथि में नहीं है तो वह काम कैसे कर पाएगा जिससे उसके वेतन एवम् नौकरी पर भी खतरा मंडराएगा।और तो और विदेशी निवेश के कारण लोकल व्यापारियों की भी रोज़ी रोटी पर गहरा असर पड़ सकता है।सरकार केवल अपने मत को मजबूत करने के लिए और अपनी जेब नभरने के लिए ऐसे बिल को पास कर रही है जिससे लोकतंत्र के उसूलों की हत्या हो रही है।

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