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पीपल बाबा ने जंगलों में तालाब निर्माण कर पेश की मिसाल

यूं तो तालाब बनाने के कई तरीके होते है ,लेकिन सबसे कारगर तरीको में से एक पीपल बाबा ने हमे बताया । आइए जानते है की क्या है पीपल बाबा का यह कारगर तरीका और कैसे बनाया जाता है जंगल मे तालाब।

तालाब बनाने के लिए सबसे पहले तो वह हिस्सा ढूंढना ज़रूरी है जहाँ पर सबसे ज़्यादा ढलान हो , आमतौर पर यह ढलान जंगल के मात्र 10 % हिस्से में पाई जाती है। ढलान का पता लगाने के बाद तालाब के 10% हिस्से पर जलकुंभी लगाई जाती है, न ज़्यादा न कम मात्र 10% क्योंकि ज़्यादा जलकुंभी लगाने से तालाब में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा ज्यादा हो जाती है, जो की तालाब के जीवन चक्र में बाधा बन सकती है । ईस कार्य के बाद तालाब के चारो और पेड़ पौधे लगा दिए जाते है जो भविष्य में मिट्टी को पकड़ कर रखने में काफी सहायता देते है, साथ ही साथ जंगलों में ऑक्सिजन की भी मात्रा को बढ़ाते है।

तालाब में जहाँ पानी आने के रास्ते पर एक खास किस्म की घास लगाई जाती है जिसका नाम अम्ब्रेला पोम है , इस घास को लगाने से पानी के अंदर मौजूद बेकार पदार्थ हट जाते है और पानी प्यूरीफाई हो कर तालाब में आता है।

पीपल बाबा के इस तरीके से जंगल समेत ज़मीन के नीचे के जलस्तर में भी काफी फायदा पहुचता है। आमतौर पे जहाँ पानी एकत्र होता था वह तालाब के निर्माण कार्य के बाद 2-3 वर्ष में साफ और स्वच्छ तालाब बन जाता है। यह तरीका पर्यावरण के लिहाज से बहुत ज़रूरी एवं सम्मानीय है।

पीपल बाबा की इस मुहिम स3 कोरोना काल मे भी काफी फायदा पहुंचा है , जहाँ गावो में जल की कमी होने के कारण गर्मी में सूखे जैसी स्तिथि पनप उठती थी वहां आज जल मगन तालाब देखने को मिल रहे है । उत्तर प्रदेश में अकेले पीपल बाबा ने 30 ज़्यादा तालाबो का निर्माण कर एक मिसाल पेश की है।

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