हॉलीवुड से बॉलीवुड के पिछड़ने की वजह कौन?

Abhinav Aazad

(filmybaapofficial)

जब हम फिल्म देखते हैं वह फिल्म तो सिर्फ 3 घंटे की ही होती है लेकिन उसका असर हम पर बहुत समय तक रहता है, कई दिन कई महीने या फिर कई साल। लोगों में जागरूकता अभियान चलाए जाने का  फिल्मों का सबसे सशक्त तरीका हो सकता है अगर हम उसका प्रयोग सही तरह से करते हैं और लोगों तक संदेश उचित तरह से पहुंचा पाते हैं। हम लोग सिनेमा को सिर्फ कुछ घंटों का मजा और घरेलू चिंताओं से दूर रहने की वजह समझ कर देखते हैं लेकिन सिनेमा इससे ऊपर कुछ और ही है।


अगर हम कुछ बातों पर गौर करें तो हमें पता चलेगा कि सिनेमा हमारी लाइफ को अंदर से बदलता है कभी-कभी यह बदलाव इतना धीमा होता है कि हमें पता नहीं चलता लेकिन वह हम में पलता रहता है और जब हमें पता चलता है तब तक वह हमारी जीवन शैली का एक अभिन्न अंग बन जाता है। यही वजह है कि ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ फिल्म रिलीज होने के बाद भारत से विदेश जाने वाले  टूरिस्टों में स्पेन जाने वालों का प्रतिशत बहुत बढ़ गया था, यही वजह है कि ‘3 इडियट्स’ रिलीज होने के बाद आईआईटी में एडमिशन लेने वालों का प्रतिशत थोड़ा सा कम हो गया। यही वजह है कि फिल्मों के किरदारों के हेयर स्टाइल सलून में ट्रेंडिंग करने लगते हैं और लोग वैसे हेयर कट कटाने जाया करते हैं। सिनेमा एक गीली मिट्टी की तरह है हम उससे क्या बनाना चाहते हैं यह हम डिसाइड कर सकते हैं पर अगर वह पक जाएगा तो हम यह नहीं डिसाइड कर सकते कि हमें क्या बनाना है।


आपने अक्सर लोगों को शिकायत करते सुना होगा कि भारतीय सिनेमा या बॉलीवुड कभी भी हॉलीवुड या विदेशी सिनेमा की बराबरी नहीं कर सकता इसका कारण कोई फिल्म मेकर या एक्टर या फिर प्रोडक्शन हाउस पूरी तरह से नहीं है। इसका कारण एक हमारी ऑडियंस की पसंद भी है। फिल्म बनाने वाले अपना भी फायदा देखते हैं उनकी भी एक फैमिली होती है जैसा सिनेमा भारत में पसंद किया जाता है वह क्वालिटी सिनेमा नहीं है और जो क्वालिटी सिनेमा है वह भारत ने पसंद नहीं किया जाता, यही वजह है कि भारतीय सिनेमा पिछड़ा हुआ है। जब आप देखते हैं कि हॉलीवुड में डिकैप्रियो, अल पचीनो, या फिर रॉबर्ट डॉउनी जूनियर की फिल्में खूब पैसा कमाती हैं लेकिन साथ में क्वालिटी सिनेमा भी देती हैं जिसकी वजह से हॉलीवुड ग्रोथ कर रहा है। वहां का कल्ट सिनेमा, क्वालिटी सिनेमा और कमर्शियल सिनेमा लगभग एक ही है जिससे डायरेक्टर प्रोड्यूसर एक्टर सभी को मोटिवेशन भी मिलता है। दरअसल फिल्मों का सही प्रयोग यही है कि क्वालिटी के साथ साथ कमाई भी की जा सके।

अगर आप यही भारत में देखें तो चीजें उल्टा है भारत में ऐसे कम ही एक्टर हैं जो कल्ट सिनेमा और कमर्शियल सिनेमा दोनों के लिए फिल्में देते हैं। आप सलमान खान को देखने जाते हैं पैसा लगाते हैं लेकिन उनकी फिल्मों की कड़ी निंदा करते हैं। फिल्म क्रिटिक्स इरफान खान की मूवी की तारीफ करते हैं और आप वहां पैसा नहीं लगाते हैं यही वजह है कि जब गार्जियन ने अपनी 100 बेहतरीन फिल्मों की लिस्ट जारी की उसमें भारत की सिर्फ एक ही फिल्म थी ‘गैंगस आफ वासेपुर’ और अगर आप उसका कलेक्शन भारत में देखें तो वह जिस तरह की फिल्म है उसके साथ कभी भी न्याय नहीं हो पाता। यही वजह है कि भारतीय सिनेमा पिछड़ा हुआ है ।

बॉलीवुड दो गुटों में बट गया है- कॉमर्शियल और आर्ट। इस बंटवारे की वजह से भारत में अच्छी फिल्में कम बनती हैं और कमर्शियल सिनेमा ज्यादा बनता है। और इसकी सबसे बड़ी जिम्मेदार है भारत की ऑडियंस।


जब आप नवाजुद्दीन सिद्दीकी, मनोज बाजपाई, के के मेनन और दूसरे अच्छे एक्टर्स पर पैसे लगाएंगे उनकी पिक्चर देखने जाएंगे तो उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा और आपके सामने अच्छा सिनेमा उभर कर आएगा। लेकिन हम हर बार कमर्शियल सिनेमा देखना पसंद करते हैं यही वजह है कि कई फिल्में जो मिसाल हो सकती हैं फ्लॉप हो जाती हैं। अगर सिनेमा का डेवलपमेंट करना है तो हमें क्वालिटी सिनेमा और कमर्शियल सिनेमा दोनों के बीच का अंतर खत्म करना होगा और यह अंतर खत्म करने की शुरुआत हम खुद से कर सकते हैं अच्छी फिल्मों पर पैसा लगाकर ना की कमर्शियल फिल्म पर पैसा उड़ा कर।

रामाधीर सिंह यूं ही नहीं कहता था कि “जब तक भारत में सनीमा है लोग चू***या बनते रहेंगे”।  क्योंकि हम जो आज तक बॉलीवुड का सिनेमा देखते हैं वह हमें बेवकूफ बना रहा है और हमारा ही फायदा उठा रहा है।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हमें खराब फिल्में नहीं देखनी चाहिए हमें खराब फिल्में देखनी चाहिए ताकि हमें अंतर पता चलता रहे अच्छे और बुरे में बस हमें इतना सा बदलाव करना है कि हमें खराब फिल्म में पैसे नहीं लगाने हैं खराब फिल्मों को मोबाइल में देखिए और जो अच्छा सिनेमा है उसे थिएटर में जा कर देखिए ताकि अच्छा सिनेमा जीवित रह सके और उसके बाद भी आपके सामने उस तरह की फिल्में आती रहे और बदलाव लाती रहे।

“जब तक लोग गलत सिनेमा देखते रहेंगे तब तक लोग ch***ya बनते रहेंगे”
:- रामाधीर सिंह की आत्मा

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