Pop Culture Hub

Web Shows

जानिए एन एम प्रताप की पूरी कहानी,DRDO में नही नियुक्त किये गए इन एम प्रताप

 Fact Check-

DRDO में नही नियुक्त किये गए इन एम प्रताप।ट्वीटर पर खबर वायरल हो रही थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें DRDO साइंटिस्ट के रूप में नही नियुक्त किया गया है। यह खबर वायरल होने के बाद इन एम लरताप ने बातचीत में बतलाया उन्हें अभी तक ऐसा कोई आफर नही आया है।आपको बता दे DRDO में साइंटिस्ट बनने के लिए विज्ञान / इंजीनियरिंग श्रेणी में वैज्ञानिकों के लिए आवश्यक योग्यता संबंधित विषयों में प्रथम श्रेणी में मास्टर डिग्री और पद के आधार पर 3 से 15 वर्ष के बीच का कार्य अनुभव होना आवश्यक है। 

फ़िल्म उरी द सर्जीकल स्ट्राइक में आपने एक युवा साइंटिस्ट जो DRDO में इंटर्न के तौर पर काम कर रहे थे उनका गरुड़ जैसा दिखने वाला ड्रोन देश के लिए पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक के वक़्त काफी अहम भूमिका में इस्तेमाल किया गया था।आपको बता दे तक ऐसा ही वाक्य हमारे सामने आया है,कर्नाटक के एनएम प्रताप,ये एक युवा साइंटिस्ट है और उन्होंने जुगाड़ू ढंग से ड्रोन बनाया है।
आज हम आपको प्रताप के जीवन की पूरी कहानी बताने जा रहे है ।कर्नाटक राज्य के निवासी महज़ 21 वर्ष के एनएम प्रताप ने कूड़े कचरे के समान से जुगाड़ करके ड्रोन तैयार किया है।प्रताप जब सिर्फ 14 साल के थे तब उन्हें ड्रोन के बारे में जानकारी प्राप्त हुई,उन्होंने शौक के तौर पर दरों को खोलना ,सुधारना,उसके अस्थि पंजर जोड़ तोड़ कर काम करना शुरू किया।
फिर प्रताप ने दो साल बाद यानि 16 साल की उम्र में ड्रोन तैयार कर किया जो उड़ सकता था और पिक्चर्स कैप्चर कर सकता था।ठीक वैसा ही जैसे 3 इडियट्स मूवी में दिखाया गया है।उन्होंने यह ड्रोन अटाले में निकले हुए सामान के जुगाड़ से तैयार किया था।
कहते है ना अगर सीखने की  जिज्ञासा और ललक इंसान में हो तो वो कुछ भी हासिल कर सकता है।प्रताप को शुरू से ही ड्रोन को बनाने की चाह थी और उसे उड़ते हुए देखना चाहते थे ,इसलिए वह इस काम में जूट रहे और उनका ड्रोन बनाना सफल हो गया।
इंडिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कई तरह के ड्रोन बनाये है जैसे टेलीग्राफी ड्रोन सीमा पर सुरक्षा के लिए,ट्राफिक मैनेजमेंट ड्रोन सड़क पर ट्रैफिक नियंत्रण करने के लिए बनाया,ऑटो पायलट दरों,पायलट रहित प्लेन आदि उनके प्रोजेक्ट्स में शामिल है।इसी के साथ उन्होंने कोई हैकिंग से बच्चाव करने के किये ताकि कोई हैकिंग  के ज़रिए ड्रोन की इनफार्मेशन न हासिल कर ले इसलिए इसमे  क्रिप्टोग्राफी का भी इस्तेमाल किया है।
आपको बता दे प्रताप ने काफी बड़े बड़े कामों में अपने ड्रोन की सहायता से प्रशासन की मदद करवाई है जैसे कर्नाटक बाढ़ आपदा में उन्ही के ड्रोन की मदद से कई राहत कार्य किये गए थे।प्रताप विश्व भर में ड्रोन बनाने के टैलेंट से काफी उंचाईयां भी हासिल कर चुके है।उन्हें इंटरनेशनल ड्रोन एक्सपो 2018 में अल्बर्ट आइंस्टीन इनोवेशन गोल्ड मैडल से नवाज़ा गया था।उन्हें करीबन 87 देशों से विभिन्न तरह के दरों में अपना योगदान देने के लिए कई तरह के आफर आ चुके है ।प्रताप ई वेस्ट का इस्तेम्मल करके ड्रोन तैयार करते है,जो सुरक्षा और आपदाओं में मुख्य भूमिका निभाने में काम आते है।वो अबतक 600 से भी ज्यादा ड्रोन बना चुके है और उन्हें ड्रोन साइंटिस्ट के नाम से पहचाने जाने लगा है।

LEAVE A RESPONSE

Your email address will not be published. Required fields are marked *

DMCA.com Protection Status