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शिमला समझौते के 48 साल,जानिए पूरा इतिहास

हम जानते है LOC पर भारत और पाकिस्तान के बीच कैसे रिश्ते है।वास्तव में यह मसला 1972 के शिमला समझौते से ही चला आ रहा है।
1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के बाद करीबन 93 हज़ार  पाकिस्तानी सैनिकों को भारत द्वारा युद्धबन्दी कर लिया था।1971 के यूद्ध के बाद पूर्वी पाकिस्तान अलग देश बनकर बांग्लादेश बन गया।तभी से भारत पाकिस्तान के रिश्तों में तना तनी उतपन्न हो गयी ,इसी बीच पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने भारत के सामने शांति वार्ता का प्रस्ताव रखा।इसके लिए शिमला को स्थान चुना गया। देश की प्रधानमंत्री तब इंदिरा गांधी थी और वो 27 जून को ही शिमला के लिए रवाना हो गयी।
समझौता कैसे हुआ?
2 जुलाई की आधी रात को 10 :30 बजे से बैठक शुरू हुई जो करीबन 12:40 बजे तक चली।तब भारत और पाकिस्तान के बीच समझौते हुए ।
शिखर वार्ता 7 चरणों में 28 जून से 1 जुलाई तक चली थी।
इंदिरा गांधी ने पत्रकारों से बातचीत करते वक़्त बतलाया की शिखर वार्ता का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान को शत्रु की नज़र से देखना नही है।एक नई शुरआत करने के लिए  यह वार्ता आयोजित की जा रही है।

शिखर वार्ता में हुए समझौते के कुछ मुख्य बिंदु

  • जब भी आगे चलकर किसी भी मसले पर दोनों देशों में बातचुट के दौरान किसी तीसरे पक्ष को मे लाने की अनुमति नही होगी।
  • पाकिस्तान के 93 हज़ार युद्धबन्दियों को शिमला समझौता होने के बाद रिहा किया गया था।
  • पाकिस्तान को उनकी ज़मीन जो 1971 के युद्ध से भारत के कब्ज़े में थी वो वापस करदी गयी थी।
  • बातचीत में तय हुआ था की 17 दिसम्बर 1971 को युद्ध में जब पाकिस्तानी सेना द्वारा आत्मसमर्पण किया गया था तब से जो सिमायें दोनों देशों की थी उसे लाइन ऑफ कंट्रोल कहा जाएगा और दोनों देशों निर्धारित सीमा में वापस चले जाएंगे।
  • किस भी देश के रहवासियों को आने जाने के किये सुनिश्चित व्यवस्थाएं मौजूद की जाएंगी और सीमा को बदलने की कोशिश किसी भी देश द्वारा नही की जाएगी।
शिखर वार्ता 5 दिनों तक चली थी
  • 28 जून -वार्ता का पहला दिन –अली भुट्टो के साथ उनकी बेटी भी शिमला आयी थी।पहले दिन बैठक एक घण्टे तक चली थी जिसके बाद दूसरे दिन से बातचीत में  गर्मी आ गयी।
  • 29 जून -वार्ता का दुसरा दिन-  इस दिन पाकिस्तान के युद्धबंदियों की रिहाई पर बातचीत हुई।पर बाकी अहम मसलों पर बातचीत बहुत ठंडी थी।
  • 30 जून -वार्ता के तीसरे दिन बातचीत कश्मीर के मुद्दे पर हुई।
शिखर वार्ता को सफल अंजाम देने के लिए उन्होंने निजी तौर पर बातचीत करना शुरू की।
  • 1 जुलाई -वार्ता का चौथा दिन – इस दिन भी बातचीत से कोई  सकारात्मक नतीजे उभरकर नही आये।अली भुट्टो पाकिस्तान बिना किसी बड़ी डीलहुए बिना वापस नही जाना चाहते थे इसलिए उन्होंने इंदिरा गांधी से युद्धबंदियों की रिहाई की बात सामने रखी ।इसके बदले में इंदिरा गांधी ने उनसे LOC बॉर्डर को इंटरनेशनल बॉर्डर मानने की मांग रखी और भुट्टो ने यह बात मां ली और पाकिस्तान वापस चले गए।
  • 2 जुलाई -अब तक खबर आ चुकी थी की दोनों ही देशों के बीच की परेशानियां अब खत्म होगयी है।पर आधी रात को फिरसे बैठक हुई और कुछ समझौते किये गए।
  • आगे से दोनों देशों के मसले शांतिपूर्ण तरीकों से बातचीत के ज़रिए सुलझाए जाएंगे।
  • कभी भी बल प्रयोग नही किया जाएगा।
  • कशमीर सहित सभी तरह के विवाद बातचीत से सुलझाए जाएंगे एवम दोनों देशों को राजनैतिक स्वतंत्रता में किसी भी तरह की अड़चन देखने को नही मिलेगी।
इन सभी फैसलों के बाद सन्धि पर हस्ताक्षर किये गए और सभी युद्धबंदियों को रिहाई दे दी गयी।

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