हर साल देश में 4.6 करोड़ लड़कियां हो जाती है लापता, देश के लिए शर्म की बात

हमारे देश में हमेशा से ही महिलाएं अपने हक के लिए लड़ रही है। लोग नारी सशक्तिकरण, महिला सुरक्षा पर सालों से बात कर रहे है। मौजूदा सरकार ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा भी दिया और लड़कियों की शिक्षा पर ज़ोर भी। ऐसा लगता है की महिलाओं के लिए सब कुछ हो रहा है अब किसी परेशानी की बात नहीं है। पर जैसा दिखता है वैसा होता नहीं है। हम सभी को लगता है की महिलाएं अब बराबरी में आ चुकी है लेकिन दुख की बात ये है कि ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही है। 

UNFPA की रिपोर्ट से पता चली एक शर्मनाक खबर..

हाल ही में यूनाइटेड नेशन पापुलेशन फण्ड ने 2020 की रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है की हर साल दुनिया भर में 142 मिलियन(14.2 करोड़) लड़कियां लापता है। इसमें भारत का स्थान दूसरे नंबर पर है। भारत में हर साल 46 मिलियन (4.6 करोड़)  लड़कियां लापता है। UNFPA ने यह अनुमान भी लगाया है की जन्म से पहले लिंग परिक्षण की वजह से 3 में से 2 लड़कियां लापता होती हैं। जन्म के बाद हर 3 में से 1 बच्ची की मृत्यु हो जाती है। 
जितनी लड़कियां लापता होती है उनमे से 90% लड़कियां चीन (50%) और भारत (40%) को मिलाकर हो जाती है। 
सिर्फ यही नहीं बाल विवाह की समस्या भी अबतक देश से गयी नहीं है। आज भी कई जगहों पर लड़कियों की  छोटी उम्र में ही शादी कर देते हैं।  हेल्थ ऐंड फ़ैमिली सर्वे के डेटा के अनुसार, 2015-16 में देश में हर 4 में से 1 लड़की की 18 से पहले शादी कर दी गई। इस रिपोर्ट के अनुसार, 20-24 आयु वर्ग की 26.8% लड़कियों की 18 की आयु तक शादी कर दी गई थी। 

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