आज ही के दिन हज यात्रा में मची थी भगदड़, मारे गए थे 1426 यात्री

मुस्लिम समुदाय में हज यात्रा का बहुत ही ज़्यादा महत्व होता है। हर साल दुनिया भर से 20 लाख लोग हज यात्रा करने आते है। यह उनके लिए एक बहुत ही बड़ा धार्मिक स्थल है। इतने सालो बाद भी आज भी यहां लोगों के आने की संख्या कम नहीं हुई है। इसी भगदड़ में यहां कई बार हादसे हो चुके है। कहा जाता है की जिसकी हैसियत हो उसे इस यात्रा में ज़रूर जाना चाहिए। 27 साल पहले हज का सबसे बड़ा हादसा हुआ था जिसमे 1426 हज यात्रियों की मौत हो गयी थी। आइये जाने से गंभीर हादसे के बारे में –

हज यात्रा की गुफा में मारे गए थे लोग …


 ऐसा ही एक हादसा मक्का में 2 जुलाई 1990 को हुआ था। उस वक्‍त यहां मची भगदड़ के दौरान करीब 1426 लोगों की मौत हो गई थी। यह हादसा पैदल यात्रियों के लिए बनाई गई सुरंग में हुआ था जहां एक-दूसरे से कुचलने और दम घुटने की वजह से इतने लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। हालांकि इसके पीछे अधि‍कारियों की लापरवाही सबसे बड़ी वजह थी। ऐसा भी नहीं है कि इस तरह का हादसा पहले कभी नहीं हुआ। पिछले कुछ वर्षों में हज पर जाने वाले पैदल यात्रियों के लिए बनाई गई सुरंग में भगदड़ मचने जैसी घटनाएं भी हुई हैं। लेकिन यहां पर होने वाले बड़े हादसों में यह एक था।
हर साल सरकार द्वारा इतना इंतज़ाम करने के बावजूद भी यह हादसे हो जाते है। हर वर्ष सरकार को हज यात्रा में अरबो रूपए खर्च करने पड़ते है। 

और कब हुए है ऐसे हादसे 


यह एक बार ही नहीं हुआ है। हज यात्रा में कई बार यात्री मारे गए है। 
1. 1991 में सऊदी अरब से नाइजीरिया जा रहे विमान के हादसे का शिकार होने की वजह से इसमें मौजूद सभी 261 यात्रियों की मौत हो गई थी।यह सभी यात्री हज यात्रा से वापस अपने देश जा रहे थे। 
2.  साल 1997 में मीना में टेंटों में लगी आग के कारण 340 लोगों की मौत हो गई थी और और 1400 से अधिक घायल हो गए थे। यह भी हज यात्रा के समय हुआ था। कई लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी थी। 
3. साल 1998 में शैतान को पत्‍थर मारने की रस्‍म में दौरान हुए हादसे में करीब 110 लोग मारे गए थे और करीब 180 हज यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे । पत्थर मारने की रस्म हज यात्रा में एक बहुत ही बड़ी रस्म मानी जाती है। यात्री मीना लौटते वक़्त पत्थर इखट्टा कर शैतान को मारते है। 
4. साल 2001 और 2002 में हुए हादसों में 30 से अधिक लोगों की जान मीना में गई थी।
5. वर्ष 2003 में एक भगदड़ के दौरान करीब 244 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी।
6. वर्ष 2006 में 363 हज यात्री यहां पर हुए हादसे में मारे गए थे।
7.  सितंबर 2015 में हुई भगदड़ के दौरान यहां पर 2200 से अधिक लोगों की जान चली गयी थी। इस दिन को हज यात्रा का काला दिन माना जाता है। इतनी ज़्यादा मौतें आज तक हज यात्रा में नहीं हुई है। 
सरकार के इतने प्रयासों के बावजूद भी यहाँ काफी हादसें देखने को मिलते है। ऐसा इसलिए है क्यूंकि हज यात्रा में जाने वाले लोग इतने सारे है की वहां हमेशा ही भगदड़ सी मची रहती है और लोग दूसरो को कुचल कर आगे बढ़ते है, कइयों का दम घुट जाता है। लेकिन फिर भी हर साल यहां आने वालो की संख्या कम नहीं होती बल्कि बढ़ती है।

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