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भारत के ऐसे अनोखे मंदिर जहाँ राम नहीं रावण की आराधना होती है

आप सभी रामायण की कथा से भली  भांति अवगत होंगे।  राम जी का  विष्णु भगवान के परम्  अवतार थे। उन्होंने धरती पर राक्षसों का वध करने के लिए जन्म लिया था।  हर युग में जब पाप सत्य से ज़्यादा बढ़ जाता है तब तब भगवान उनके भक्तों की सुरक्षा  करने के लिए स्वयं पृथ्वी पर अवतार लेते है। भगवान राम  जब उनका १४ वर्ष का  वनवास काट रहे थे तब एक दिन सीता जी को रावण अपहरण करके ले गया था। रावण को पूरी तरह से हमारी पुराणों में एक राक्षस प्रजाति का इंसान बताया है। पर भारत मैं कुछ ऐसे अनोखे मंदिर भी है जिधर रावण का पूजा पाठ किया जाता है।  आईये जानते है ऐसे अनोखे मंदिरों के बारे में। 
 कर्णाटक 


कर्णाटक में कोलर जिले मैं रावण की पूजा पाठ की जाती है। लोग वहां पर फसल महतश्व के उपलक्ष्य में,काफी बड़ा जुलुस का आयोजन करते है। आपको बता दे रावण शिव जी का परम् भक्त था और बहुत ज्ञानी व्यक्ति था। लोग उसे शिव जी का परम् भक्त होने के कारन यहाँ पर पूजते है।  भगवान शंकर के साथ रावण का भी जुलुस लंकेश्वर महोत्स्व में निकाला जाता है। कर्नाटक राज्य में मालवल्ली तहसील के मंड्या जिले में रावण का विशाल मंदिर है।
मध्य प्रदेश 


मध्य्प्रदेश में स्थित विदिशा जिले में एक गाँव है जहाँ रावण का मंदिर है। यहाँ पर राक्षसराज रावण की पूजा पाठ की जाती है और बताया जाता है की यह राज्य मैं रावण का पहला मंदिर है।इसी राज्य मैं एकजिले  का नाम है मंदोदरी। कहा जाता है मंदसौर रावण की पत्नी का मायका है जिस वजह से इस शहर का नाम मंदसौर पड़ा। इस जिले मैं खानपुर इलाके मैं रावण की एक विशाल प्रतिमा है रावण रुंडी नाम के क्षेत्र में। इसलिए रावण को यहाँ का दामाद भी कहा जाता है। 
राजस्थान 


राजस्थान में मंदोदरी और रावण की शादी रचाई गयी थी इसलये यहाँ पर मंदोदरी नाम की जगह पर जो जोधपुर मैं स्थित है वह पर विवाह हुआ था। यहाँ पर रावण की एक विशाल मूर्ति मौजूद है एवं चांदपोल नमक क्षेत्र मैं रावण का  एक भव्य मंदिर भी मौजूद है।  
हिमाचल प्रदेश 


हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले के बैजनाथ इलाकाक जो शिवनगरी नाम से बहुत प्रसिद्ध है।  कहा जाता है की  इसी स्थान पर रावण ने भगवान  घोर तपस्या करके मोक्ष पाने का वरदान प्राप्त किया था। यहाँ पर रावण को बहुत श्रद्धा भाव से पूजा जाता है। 
उत्तर प्रदेश 


उत्तर प्रदेश के कानपूर जिले मई रावण का भव्य मंदिर मौजूद है।  यह मंदिर का निर्माण १८९० मैं किया गया था। यहाँ पर हर साल सिर्फ दुस्शेहरे के दिन सुबह पट खोले जाए है और भक्तों की भीड़ उमड़ती है और शाम को पट एक साल इ लिए बंद क्र दिए जाते है। यहाँ पर रावण को शक्ति का प्रतीक मानकर पूजा अर्चना की जाती है। श्रद्धालु तेल के दिए जलाकर अपनी अपनी मनोकामना यहाँ पर हर साल पूरी करने आते है। 

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