पी वी नरसिम्हा राव बायोग्राफी :जन्मतिथि विशेष जानिए उनका पीएम बनने तक का सफर

ऐसा शायद ही कभी हुआ होगा की किसी पूर्व प्रधानमंत्री की मृत्यु हुई हो और उन्ही की पार्टी हैड क्वार्टर में उनका देह लाने की अनुमति प्रदान न की जाए।ऐसी घटना पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राओ के साथ 23 दिसम्बर 2004 को हो चुकी है ।भारत के पूर्व प्रधानमंत्री को उन्ही की पार्टी कांग्रेस के हैड क्वार्टर में उनका शव लाने की अनुमति नही मिली थी ।
पांच वर्षों तक प्रधान मंत्री का कार्यभार सम्भालने के बावजूद उन्ही की पार्टी के द्वारा ऐसा बर्ताव इतिहास में एक बड़ी अजीब और अनोखी घटना के रूप में दर्ज रहेगा।
नरसिम्हा राव बायोग्राफी
नरसिम्हा राव का जन्म
28 जून 1921 को जिला करीम नगर तेलंगाना के छोटे से गांव वंगारा में पामुलरापति वेंकट नरसिम्हा राव का जन्म हुआ था।उनका जीवन का सफर काफी दिलचस्प रहा।
देश की आज़ादी के खिलाफ गुरिल्ला लड़ाई हैडरबदाद सियासत के खिलाफ में उनका हिस्सा लेने से लेकर प्रधान मंत्री बनने का सफर बेहद अनोखा और संघर्ष से भरा था।
नरसिम्हा राव करीबन देश विदेश की 13 भाषाओं के ज्ञानी थे।वो दिल्ली से रवाना हो रहे थे और उनकी किताबें इत्यादि समान भी ट्रक में जा रहा था लेकिन कहते है न किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था ।21 मई 1991 को कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गांधी की हत्या हो गयी और तभी से कांग्रेस एक बड़ी पार्टी के रूप में देश में उभरकर आयी।
नरसिम्हा राव का प्रधानमंत्री बनने का सफर।
जब राजीव गांधी की मृत्यु हुई तब उनकी पत्नी सोनिया गांधी उनकी जगह नेतृत्व सम्भालने के लिए उस काबिल नही थी इन्ही कारणों से कांग्रेस पार्टी में पीएम पद के लिये नेताओं मैं असमंजस पैदा हो गयी।उस समय सोनिया गांधी को अर्जुन सिंह ने नरसिम्हा राव का नाम पीएम पद के लिए सुझाया।इस घटना का उल्लेख शरद पवार ने अपनी किताब के ज़रिए किया है ।
राव देश के नौंवे प्रधान मंत्री है और 1991 से 1996 तक उन्होंने प्रधान मंत्री पद का कार्यभार संभाला था।
हो सकता है की अर्जुन सिंह को वरिष्ठ बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य में अनियंत्रता को देखते हुए निर्देशों का आदेश मानते हुए उम्मीदवारों में राव सबसे सटीक नज़र आये होंगे।इस तरह दक्षिण से पहली बार कोई प्रधान मंत्री पद के किये चयनित किया गया था।लेकिन राव अर्जुन सिंह की सोच से काफी अलग साबित हुए।
राव के वक़त देश में काफी नाज़ुक स्थितियां उत्पन्न थी।देश की अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा नुकसान सोवियत संघ के विघटन के बाद हुआ।ऐसी हालात में देश का कीमती सोना भी वर्ल्ड बैंक से उधार लेने ओर गिरवी रखा गया था।उस वक़्त भारत के पास 15 दिनों तक के लिए ही आयात करने लायक मुद्रा बाकी थी।
उस वक़्त राव ने एक बहुत हिम्मत भर फैसला लिया।उन्होंने नेहरू की चलती आ रही समाजवादी अर्थव्यवस्था को हटाकर आर्थिक उदारीकरण देश में शुरू किया।हमारे देश में रोय का मुकयन किया गया,लाइसेंस राज कौफी तरह से खत्म किया गया।तत्कालीन प्रधान मंत्री  पीएम मोदी जिस भारतीय बाजार की दुनिया भर में वाह वाही करते नज़र आते है उसकी नींव असलियत में नरसिम्हा राव द्वारा रखी गयी थी।सिर्फ अर्थव्यवस्था को ही मज़बूती प्रदान नही की थी ,उन्होंने देेश की रक्षा में काफी बड़ा योगदान निभाया था।
पाकिस्तान द्वारा 1994 में इस्लामिक देशों का गरौओ OIC के समर्थन से भारत को संयुक्त  राष्ट्र संघ का मानवाधिकार कॉउन्सिल में भारत को पूरी तरह से निशाना साधने की रणनीति तैयार की गयी थी।अगर उस समय भारत पर कश्मीर में मानवाधिकार का उल्लंघन का आरोप सच साबित हो जाता तो  कश्नुर का मुद्दा अंतराष्ट्रीय हाथों में चला जाता और भारत पर कई तरह की रोक टोक लगा दी जाती।
ऐसे नाज़ुक वक़्त में राव ने बहुत ही कूटनीतिक तरकीब से सभी चालें चकई और राजनीति से हटकर उन्होंने जिनेवा में इस मामले  की  सुनवाई में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अटक बिहारी वाजपेयी को भारतीय टीम का अध्यक्ष बनाकर भेज और कश्मीरी नेता पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्लाह को भी उस टीम में भेजा।इसी के साथ ईरान में विदेश मंत्री दिनेश सिंह को भेजा जहां पर चीन के ववदेश मंत्री पहले से ही उपस्थित थे।इन्ही सब रणनीति से चीन और ईरान जैसे देश भारत के समर्थन में आ गए और पाकिस्तान की यह तरकीब चूर चूर होगयी ।राव दबाव को झेलना और उसमे काम करने में काफी निपुण थे।यहां तक की परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने के लीज सभी पश्चिमी देश और अमेरिका से लगातार दबाव के। बाद भी उन्होंने संधि ओट हस्ताक्षर नही किये और कई तरह के मिसाइल कार्यक्रमिन में उन्होंने काफी अच्छे दिशा निर्देश देश को आगे बढ़ाने के लिए दिए।
उन्होंने आतंवादियों को भी देश से खत्म करने में काफी बड़ा योगदान निभाया।उनके कार्यकाल में उन्होंने देश को बहुत सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार करदिया था।उनके कार्यकाल के बाद उनोर कई तरह के विवाद हुए और वो काफी विवादों में फसे भी।किसी विवाद में तो उन्हें साल 2000 में सजा भी सुनाई थी।इसके बाद राव को 2 साल बाद हाइकोर्ट द्वारा बड़ी करदिया गया।उनकी मृत्यु इसके दो साल बाद हार्ट अटैक से हो गयी।उनका परिवार उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में ही करना चाहती थी लेकिन तब पार्टी की कमान अवइया गांधी के हाथों में थी लेकिन उन्हें यह इजाज़त नही मिली उर उनकी समाधि के किये कांग्रेस सरकार ने उनके परिवार को जगह भी उपलब्ध नही करवाई।पार्टी के वरिष्ठ एवं कर्मठ नेता के साथ ऐसा व्यवहार निंदनीय है ।देश के लिए किया गया उनके योगदान का श्रेय उन्हें आधुनिक भारत के इतिहास में उन्हें ज़रूर मिलता रहेगा।
नरसिम्हा राव बायोग्राफी
आज पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम में प्रधान मंत्री ने भी नरसिम्हा राव को उनके जन्म दिवस पर कार्यक्रम के ज़रिए याद किया और उनके महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख किया।

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