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मूवी रिव्यु- फेमिनिज्म पर बनी अनुष्का शर्मा की ‘बुलबुल’ दमदार है लेकिन हॉरर नहीं!

Abhinav Aazad
“अब जब भी कोई रावण सीता को हाँथ लगायेगा तो उसका वध सीता ही करेगी, राम नहीं “ इस बात का मैसेज देती है फ़िल्म बुलबुल। इससे यह साफ है कि फ़िल्म फेमिनिज़्म को डिफाइन करती है। अनुष्का शर्मा के बैनर क्लीन स्लेट के तले बनी बुलबुल लगभग हर क्राइटेरिया पर खरी उतरती है। अन्विता दत्त द्वारा लिखित और निर्देशित है बुलबुल, अन्विता का काम अच्छा है लेकिन काफी समय तक लोगों को याद रहे ऐसी कोई बात नज़र नहीं आती है। बतौर निर्देशक उनकी यह पहली फिल्म है और बतौर पहली फिल्म काफी बेहतर और सुलझी हुई है।
इस फ़िल्म के मुख्य कलाकार तृप्ति डिमरी, अविनाश तिवारी, राहुल बोस और पाओली डैम हैं। 
तृप्ति डिमरी ने पूरी तरह से फिल्म पर कब्ज़ा किया है और अपने उनका अभिनय किरदार के साथ न्यायसंगत लगता है। इतना कि आप उनके फैन हो जाओगे। राहुल बोस और पाओली डैम ने काफी समय बाद पर्दे पर वापसी की है और अच्छी एक्टिंग के साथ दर्शकों की वाह-वाही लूटने की पूरी कोशिश की है। बुलबुल में परमब्रत चटोपाध्याय एक्स्ट्रा पैकेज हैं, डायलॉग तो ज्यादा उनके हिस्से नहीं है लेकिन उन्होंने भी गहरी छाँप छोड़ी है।
कहानी बंगाल के एक गाँव और वहां फैली अफवाहों पर आधारित है,  बंगाली कल्चर जिस खूबसूरती के साथ दिखाया गया है वह काबिल-ए-तारीफ है। कहानी में ज्यादा सस्पेंस और थ्रिल तो नहीं है लेकिन फिर भी आपको निराशा नहीं होगी।
 फ़िल्म शुरू होती है एक बाल-विवाह से जब एक छोटी बच्ची की शादी एक नवयुवक आदमी से कर दी जाती है, उसके बाद कहानी फ्लैशबैक्स में जाती है और फिर से वर्तमान की पटरी पर दौड़ती है। तृप्ति बड़ी बहू और ठकुराइन बनी नज़र आती हैं और अपनी मुस्कान और आँखों से बखूबी दर्शाती भी हैं। अविनाश तिवारी का काम भी सराहनीय है। इसके अलावा सपोर्टिंग एक्टर्स ने भी अच्छा काम किया है। बैकग्राउंड म्यूजिक और साउंड इफेक्ट्स कमाल का लगता है, सिनेमेटोग्राफी नोटेबल है। 

इस सब के बावजूद बुलबुल हॉरर जॉनर के साथ न्याय नहीं करने में नाकाम साबित होती है। फिल्म को कहीं से भी हॉरर जॉनर में नहीं रखा जा सकता है, इसे एक सिंपल कहानी माने तो ये ज्यादा बेहतर है। भारतीय सिनेमा को अपना हॉरर जॉनर काफी सुधारना होगा क्योंकि हम अभी भी चुड़ैल के पैर उलटे और वही गिने चुने सीन दिखा रहे हैं और देख रहे हैं। हॉरर इससे काफी कुछ आगे है, अगर आप इसे हॉरर फिल्म मान कर देखना चाहते हैं तो ये फिल्म आपको बहुत निराश करेगी।
लेकिन अगर आप कुछ नया और संदेश वाली मूवी देखना चाहते हैं तो यह फिल्म आपको जरूर पसन्द आएगी।
 रेटिंग:- 3/5

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