इटली ने तिरपाल की मदद से ढका एक विशाल ग्लेशियर, वजह है बहुत चौका देने वाली

पूरी दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बढ़ती जा रही है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण कई सारे ग्लेशियर पिघलते जा रहे है जो आगे चलकर समस्या का कारण बन सकते है। कई वैज्ञानिक इन ग्लेशियर को बचाने के लिए  रिसर्च कर रहे है। इटली ने अपने एरिया में आने वाले ग्लेशियर को पिघलने से बचने के लिए एक बहुत ही अनोखा तरीका ढूंढ़ निकाला है। इटली ने आज प्रेसना ग्लेशियर को सूरज को रिफ्लेक्ट करने वाले जियोटेक्स्टाइल तारपोलीन शीट से ढका ताकि ग्लेशियरको ग्लोबल वार्मिंग के कारण पिघलने से रोका जा सके। 
सितंबर के महीने तक बिछा रहेगा यह तिरपाल 
इटली की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी कंपनी ने 2008 में प्रेसेना ग्लेशियर का 30 हज़ार वर्ग मीटर का हिस्सा ढका था। पिछली बार से इस बार कई ज़्यादा किलोमीटर तक इस तिरपाल को बिछाया जाएगा। इस बार 1 लाख वर्ग मीटर का हिस्सा तिरपाल से ढका जाएगा। लोम्बार्डी और ट्रेंटिनो अल्टो अदिगे क्षेत्रों के बीच लगभग 2,700 से 3,000 मीटर की ऊंचाई पर टीम ने लंबे स्ट्रिप्स को बिछना शुरू कर दिया है। 
मुसीबत में है दुनिया के सभी ग्लेशियर 
इटली की एक रिपोर्ट के अनुसार 1993 से प्रेसेना ग्लेशियर एक तिहाई पिघल चुका है। ग्लेशियर को आगे पिघलने से बचाने के लिए सरकार अब काम कर रही है।  ग्लेशियर के ऊपर सफ़ेद रंग की तिरपाल लगाई जा रही है ताकि सूरज की किरणों से इसे बचाया जा सके। यह काम इटली की एक कंपनी कैरोसेलो टोनाले को सौंपा गया है। काम 22 जून 2020 से शुरु किया गया है। इस ग्लेशियर की ऊंचाई 2700 मीटर यानी 8858 फीट से शुरू होकर 9842 फीट तक जाती है।

450 डॉलर है एक शीट की कीमत 

आपको बता दें की यह शीट कोई नार्मल शीट नहीं होती। यह तिरपाल सूरज की किरणों को रिफ्लेक्ट कर देता है जिस कारण ग्लेशियर पिघलने से बचा रहता है। इस शीट को जियोटेक्स्टाइल शीट के नाम से जाना जाता है। बात करे तो एक शीट की कीमत 450 डॉलर है, यानी 34,000 रूपए के करीब। इस तिरपाल को ऑस्ट्रिया में बनाय गया है। यह तिरपाल लगने के बाद सूरज की रोशनी ग्लेशियर तक नहीं पहुँचती है। इस तिरपाल को लगाने में 6 हफ्ते लगते है और हटाने में भी 6 हफ्ते लगते है। तिरपाल को ढलान से रोकने के लिए रेट की मदद से उसे स्थायी किया जाता है। 

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