भारत चीन सीमा पर मौत के बाद भी सैनिक कर रहा है देश की रक्षा,जानिए रहस्यमय कहानी

सिक्किम पर स्तिथ भारत चीन बॉर्डर पर एक ऐसा सैनिक भी है जो अपनी मौत के बाद भी सीमा की रक्षा कर रहा है। सुनने में यह काफी अजीब लगेगा लेकिन वहां के रहवासी इस बात को सत्य मानते है। कई घटनाएं होने के बाद उन्हें समझ आया की जिस सैनिक की 48 वर्ष पहले मृत्यु हो गयी थी वो आज भी सीमा की रक्षा कर रहा है। लोगो का मानना है कि अब वह सैनिक रिटायर हो चुका है।

कौन थे बाबा हरभजन सिंह? 
30 अगस्त 1946 को बाबा हरभजन सिंह का जन्म हुआ था। 9 फरवरी 1966 को भारतीय सेना के पंजाब रेजिमेंट में सिपाही के तौर पर भर्ती हुए थे। 1968 में उन्हें 23वें पंजाब रेजिमेंट के साथ पूर्वी सिक्किम में भेजा गया।
13,000 फ़ीट ऊपर बना है बाबा हरभजन सिंह का मंदिर

हरभजन सिंह उसी सैनिक का नाम है जो वहां रक्षा करता है। नाथुला पास में स्तिथ बाबा हरभजन सिंह का मंदिर 13,000 फ़ीट की ऊंचाई पर बना है। इस मंदिर में सैनिक हरभजन सिंह की एक फोटो लगी है और उनका 48 साल पहले का सामान रखा हुआ है। कहा जाता है मरने के बाद वे वहीं रहते थे और हर रोज़ रजिस्टर में अपनी हाज़री भी लगाते थे। जब लोगो ने कई सालों तक यह देखा कि हर रोज़ उनके मरने के बाद भी रजिस्टर में हाज़री लगती थी तब उन्हें समझ आया कि उनकी आत्मा अभी इस सीमा की रक्षा कर रही है।
कैसे हुई थी बाबा हरभजन सिंह की मौत?

4 अक्टूबर, 1968 में सिक्किम के नाथुला पास में एक बहुत गहरी खाई में गिरने के बाद उनकी मौत हो गयी थी। तबसे लेकर आज तक लोग यही मानते है कि हरभजन सिंह की आत्मा सरहदों की रक्षा कर रही है। उनकी 22 साल की उम्र में ही मौत हो गई थी।आपको यह सुनकर काफी आश्चर्य होगा लेकिन हरभजन सिंह ने बाकी सैनिकों के सपने में आकर यह बताया था कि उनकी मृत्यु कैसे हुई है और उनका पार्थिव शरीर कहां मिलेगा। अगले तीन दिन जब खोज बिन की गई तो उनका शरीर उसी जगह पाया गया। 
चीन के सैनिक भी जाने से डरते है
भारतीय सैनिकों को भी यह विश्वास है कि उनके सीमा की सुरक्षा बाबा हरभजन सिंह कर रहे है। चीनी सैनिक भी सीमा में अंदर घुसने से खौंफ खाते थे और अभी भी डरते है। सिर्फ भारतीयों ने ही नही कई चीनी सैनिकों ने हरभजन सिंह को घोड़े पर सवार होकर सीमा की रक्षा करते हुए देखा है। चीनी सैनिक ने उनके मरने के बाद कई ऐसी घटनाएं देखी है। बताया जाता है कि उनके मरने के बाद वह बाकी सैनिकों के सपने में आकर बता देते थे कि चीन अगला कदम क्या उठाएगा, क्या चीन युद्ब की तैयारी कर रहा है। 
सिर्फ यही नही चीन और भारत के बीच जब फ्लैग मीटिंग होती थी तो हरभजन सिंह के मरने के बाद भी चीनी सैनिक उनके लिए एक चेयर हमेशा लगाते थे। लोग हर साल उनकी माँ को हरभजन सिंह के वेतन का एक चौथाई हिस्सा भी देने जाते थे। हर साल वो छुट्टी के रूप में अपनी माँ से भी मिलने जाते थे। एक बार उन्होंने सपने में एक सैनिक से उनकी समाधि बनाने की बात कही। उसी बात से उनके सम्मान में 13,000 फ़ीट की ऊंचाई पर बाबा हरभजन सिंह नाम का एक मंदिर बनवाया गया।
 

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