1967 मे भारत-चीन सीमा पर चली थी आखरी गोली, जानिए पूरी कहानी

कल गलावन घाटी, लद्दाख मे भारत के 20 सैनिक मारे गए। चीन और भारत के बीच झड़प होने के बाद यह हादसा हुआ। यह काफी चौका देने वाला है क्योंकि पिछले 45 साल में भारत-चीन सीमा पर ऐसी झड़प कभी नही हुई।

1967, सिंतबर मे भारत और चीन के बीच आखरी झड़प हुई थी। यह झड़प नाथू ला मे हुई थी। झड़प से पहले भारतीय और चीनी सेना के बीच हाथापाई हुई थी। इसके बाद दोनों ही पक्ष से तोपो और रॉकेट्स की धमकी मिलने लगी। इस झड़प मे भारत के करीब 88 सैनिकों की मृत्यु हो गयी थी और चीन के 300 से अधिक सैनिक मारे गए थे।

ऐसे हुई थी झड़प
झड़प से पहले 20 अगस्त 1967 में भारत ने अपनी सीमा पर बाड़ लगाने का निर्णय लिया। 20 अगस्त को यह कांटेदार बाड़ लगाने का काम भी शुरू हो गया। यह तीन परतों वाली कांटेदार बाड़ थी। 23 अगस्त को करीब 75 चीनी सैनिक भारत की सीमा की ओर आ रहे थे। सीमा पर आकर वह रुक गए। सैनिकों के लेफ्टिनेंट ने नारे पढ़ने शुरू किए और बाकी सैनिकों ने उनके पीछे दोहराया। भारत के सैनिक इसे देखते रहे और एक घन्टे बाद चीनी सैनिक वापस लौट गए। कुछ समय बाद वह विरोध करने फिर वापस आ गए।

लेफ्टिनेंट कर्नल सिंह राय के अंडर मे यह काम हो रहा था। 5 सिंतबर को बाड़ को और मजबूत बनाने के लिए उसे अपग्रेड किया जा रहा था। उसी दिन काम बंद हो गया। 7 सितंबर को फिर से काम शुरू हुआ। काम को देखते ही 100 चीनी सैनिक सीमा पर आए और उन्होंने हाथापाई शुरू की। फिर उन्होंने पत्थर मारने शुरू किए। भारतीय सैनिकों ने इसका मुंह तोड़ जवाब दिया।

11 सितंबर को फिर से उस काम को पूरा काम करने का आदेश मिला। चीनी सैनिक फिर भड़क गए। लेफ्टिनेंट कर्नल सिंह राय उनसे बात करने के लिए सीमा के उस पार गए। जैसे ही वो दूसरे पार पहुंचे चीन के एक सैनिक ने उनपर गोली चला दी और वह घायल हो गए। इसके बाद दोनों पक्षो से गम्भीर युद्ध हुआ। चीन ने वहां से मशीन गन का इस्तेमाल किया तो भारतीयों ने तोप से जवाब दिया। आग में चीन के कई सैनिक मारे गए। एक बार भारत को फिरसे वापस लौटने को कहा लेकिन भारतीयों ने इनकार कर दिया।

झड़प हुई खत्म
भारत ने 12 सितंबर को चीन को एक चिट्ठी सौंपी। 15 सितंबर को चीन ने गोला बारूद के साथ भारतीय सैनिकों के शव लौटाए और कहा “चीन-भारत की मित्रता सुरक्षित रहे”
1 अक्टूबर को चो ला में फिरसे चीन ने झड़प की शुरुवात की। भारतिय सैनिकों ने इसका मुंह तोड़ जवाब दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *