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कोरोना महामारी से कार्य क्षेत्रों को बचाने के लिए संगठनों के लिए IISC ने ‘ वर्कप्लेस रेडीनेस इंडिकेटर ‘ का निर्माण किया

भारतीय विज्ञान संस्थान के रिसर्चर्स की टीम ने KSDMA (राज्य आपद निगरानी प्राधिकरण) के साथ जुड़कर एक ऐसा इंस्ट्रूमेंट तैयार किया है जिससे किसी भी दफ्तर में कोरोना वायरस की चैन रोकने का स्वयं मूल्यांकन किया जा सकेगा।
वर्कप्लेस रेडिनेस इंडिकेटर-यह एक तरह से सलाहकार के रूप में काम करेगा जो बता पायेगा की आपका दफ्तर ,या आप जिधर भी काम कर रहे है वो महामारी की नज़र से कितना सुरक्षा है या नही।यह उस जगह का परीक्षण करके यह बताएगा की क्या सक्या जोखिम है और इसमे सुधार क्या क्या किया जा सकता है।IISC के रिसर्चर नीलेश राठौर ने बताया की यज उपयोग करने में काफी सरल है और यह जगह का पूरा अछि तरह से परीक्षण करके सभी मापदण्डों को जांचकर सभी जोखिम और सुझाव बतलायेगा।
किसी भी संगठन को इसमे कुछ जानकारियां डालना होगी जो इसका निर्णय ले पाएंगी की आपके कार्यस्थल में क्या सुविधाएं उपलब्ध है और क्या सुविधाएं में कमी है ।यह उपकरण 10 विभिन्न सुचिकाओं की मदद से पूरी गणना करके आपके सामने रिपोर्ट हाज़िर कर दिया करता है  ।हर मापदण्ड को 100 अंकों में व्यवस्थओं के अनुदार परखा जाता है।इन 10 मापदण्डो में कैंटीन,जागरूकता,आउटरीच,कर्मचारियों की मोबिलिटी,सावधानियां,संरचना,परिवहन,पेंट्री,स्वच्छता इत्यादी चीजों पर मूल्यांकन करना शामिल है।इन सभी  हिजों का सभी तरह से मूल्यांकन किया जाएगा।अनलॉक 1 हो चुका है जिस वजह से कार्यस्थल धीरे धीरे खुल रहे हैं और इस वजह से राज्य सरकार ने इस उपकरण को कार्यस्थल पर इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
सबकुछ पहले जैसा नॉर्मल हो जाए ऐसा हो नही सकता।हर जगह शर्तें ,सावधानियां के साथ ही काम फिरसे शुरू किया जा रहा है।लोग इसके साथ जीना सीख रहे है।इसके लिए यह उपकरण बहुत कारगर साबित होने वाला है।इस बीमारी से लोगों को सतर्कता बनी हुई है और मास्क ,सैनिटाइजर आवश्यक हो चुका है।इस उपकरण से एक दूसरे कार्यक्षेत्रों मैं तैयारियां और सावधानियों में तुलना भी की जा सकेगी।

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