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14 जून ,1913: जब नॉर्वे मे मिला था महिलाओं को वोट करने का अधिकार

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आज का दिन नॉर्वे के इतिहास मे हर जगह लिखा है। इसी दिन सन 1907 मे नॉर्वे मे महिलाओं को मत देने का अधिकार मिला था। आज के समय मे नॉर्वे की महिलाएं दुनिया और में अपनी छाप छोड़ रही है। 107 साल पहले नॉर्वे मे महिलाओं को वोट का अधिकार प्राप्त हुआ था। यह अधिकार 27 साल की राजनीतिक लड़ाई के बाद प्राप्त हुआ था।

क्या रहा इसके पीछे का इतिहास?
जब भी लोग नॉर्वे की सरकार से महिलाओं के वोट अधिकार की बात करते थे तो वे हमेशा यही कहते थे कि यह अधिकार भगवान की इच्छा से मेल नही खाता। उनकी बाइबिल मे यह एक गुनाह है। महिलायें कानून बनाने मे साहयता नही कर सकती। लोगो ने 1885 से संविधान को बदलने की बात की ताकि महिलाओं को भी वोट देने का अधिकार हो। आखिर मे संविधान को बदलकर 1886 मे यह अधिकार संविधान मे जोड़ा गया लेकिन 27 साल तक यह सिर्फ किताबो मे ही रहा। 27 साल बाद महिलाओ को मत अधिकार दिया गया।

1890 में लोक सभा मे महिलाओ के वोट अधिकार को लेकर बहुत बड़ी बहस हुई। कंज़र्वेटिव पार्टी के प्रवक्ता बिशॉप जे.सी ने कहा कि “महिलाएं पुरुषों का काम नहीं कर सकती है, और वह महिलाओं का काम नहीं करेगी। उससे क्या बनता है? यह उसे विकृत राक्षसी बनाता है, बिना किसी लिंग की बात के, ”उसने तर्क दिया। महिलाओं की मुक्ति के लिए नेतृत्व करने के बजाय, यह उसे “गिरावट, घर की अशांति, परिवार के क्रमिक विघटन और एक अपरिहार्य नैतिक गिरावट की ओर ले जाएगा।” और हैरानी की बात यह है कि आज इस पार्टी को 4 महिलाएं मिलकर चलाती है।

1907 मे फिर इस बात पर बहस हुई लेकिन सभा मे बैठे कई लोग उस बात से सहमत होने लगे। 5 साल के अंदर अंदर सभी को महिलाओं के वोट का महत्व समझ आ गया और 1913 मे नॉर्वे के संविधान मे बदलाव हुआ। 14 जून 1913 में नॉर्वे के संविधान मे एक अधिकार जुड़ा- ” सभी को वोट का अधिकार होगा (25 वर्ष या उससे ऊपर)।


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