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संजीता चानू पर लगे डोपिंग के आरोप खारिज हुए।

2014 और 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स की 53 किलो वर्ग और 48 किलो वर्ग में स्वर्ण पदक विजेता रही संजीता चानू पिछले 4 वर्षों से अर्जुन अवॉर्ड पाने का प्रयास कर रही हैं।

     संजीता चानू

उन पर लगे डोपिंग के सभी आरोपों को 8 जून को खारिज कर दिया गया। दो बार की कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन रह चुकी संजीता चानू ये कोशिश कर रही हैं की उन्हें वह पहचान मिले जिसकी वह हकदार हैं।
8 जून को वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) के कहने पर इंटरनेशनल वेटलिफ्टिंग फेडरेशन (आईडब्लूएफ) ने ढाई वर्षो से चल रही संजीता चानू की डोपिंग जांच पर रोक लगा दी ,और 26 वर्षीय इस भारोत्तोलक को अर्जुन अवार्ड पाने का एक मौका मिला।
संजीता ने कहा की वे 2016 में अर्जुन अवार्ड के लिए अपना नाम पेश कर चुकी थी , मगर उस वक्त उन्हें इस अवार्ड से सम्मानित नहीं किया गया। 2017 में दोबारा उन्हें अनदेखा किया गया , और फिर उन पर लगे डोपिंग के आरोपों की वजह से वे खुदको इस अवार्ड के लिए नामांकित नहीं कर सकीं। किंतु अब वे पूरी करेंगी कि उन्हें इस अवार्ड से नवाजा जाए।

    अर्जुन अवॉर्ड

इससे पहले संजीता चानू 2017 में अर्जुन अवार्ड के लिए खुद को अनदेखा करने पर दिल्ली हाईकोर्ट में अवार्ड कमेटी के खिलाफ याचना दायर कर चुकी हैं।
हाईकोर्ट ने अवार्ड कमेटी को निर्देश दिए थे की अगर संजीता चानू के खिलाफ लगे डोपिंग के आरोप गलत साबित होते हैं तो उन्हें अर्जुन अवार्ड मिलने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल किया जाए , जैसा कि 8 जून को साफ हो गया और संजीता चानू डोपिंग के आरोपों से बरी कर दिया गया।

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