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आज ही क्यों मनाया जाता है बाल श्रम निषेध दिवस, जाने पूर्ण इतिहास

इसे भी, 
सपने सजाना अच्छा लगता है,
माँ की गोद मे रोज़ रात आराम से सोना अच्छा लगता है,
बचपन को बचपन की तरह जीना अच्छा लगता है, 
मजबूरी ने इसे कर दिया वक़्त से पहले ही बड़ा,
वरना बचपन छोड़कर मजदूरी करना किसको अच्छा लगता है..

हर साल 12 जून को पूरे विश्व मे बाल श्रम निषेध दिवस (वर्ल्ड अगेंस्ट चाइल्ड लेबर) मनाया जाता है। अंतराष्ट्रीय श्रम संघ ने इस दिवस की स्थापना 2002 में की थी। इस दिन का मुख्य लक्ष्य यह रहता है कि कोई भी 14 साल से कम उम्र के बच्चो को किसी भी प्रकार से श्रम बनाकर न रखे और उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा शिक्षा प्रदान करे।
2020 के इस दिवस का थीम- वैश्विक संकट का बाल श्रम पर प्रभाव (इम्पैक्ट ऑफ वर्ल्ड क्राइसिस न चाइल्ड लेबर)।


क्या रहा इस दिन का इतिहास?
संयुक्त राष्ट्र संघ (united nation organisation) के अंदर अंतराष्ट्रीय श्रम संघ की (international labour union) एक शाखा आती है। अंतराष्ट्रीय श्रम संघ को अपने काम के कारण कई पुरस्कार मिल चुके है। वे मजदूरों और श्रमिको के हित के लिए काम करते है। इसी संघ ने 2002 मे बाल मजदूरी पर निषेध लगाने की बात पर ज़ोर दिया था। 2002 मे ही एक कानून बना जिसमे 14 साल या उससे कम उम्र वाले बच्चो को मजदूरों का काम करवाने वालो को अपराधी माना जायेगा।


क्या भारत सच मे मनाता है बाल श्रम निषेध दिवस?
अगर बात भारत देश की करे तो आज भी लाखो की कगार में बच्चे देश मे मजदूरी का काम करते है। बच्चो की तस्करी भी आम बात है। लेकिन भारत सरकार इस मामले में कुछ सालों से काफी जागरूक हो रही है। 1986 मे भारत सरकार ने बाल मजदूरी पर रोक लगा दी थी। भारत देश मे अभी भी करीब 1,26,66,377 बच्चे बाल मजदूरी का शिकार है। विश्व भर में चल रही महामारी के कारण बाल श्रमिकों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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