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जुगाड़ू विनय पाठक कैसे मना पाएँगे ‘चिंटू का बर्थडे’ !

अरे ! छः ठो मोमबत्ती संभाल ले और चाकू से कट जाए, केक तो यही होता है न !
Zee5 पर रिलीज हुई ‘चिंटू का बर्थडे’ में लीड कैरेक्टर करने वाले विनय पाठक का यह डायलॉग बहुत कुछ कह  जाता है। यह महज एक डायलॉग नहीं बल्कि कहानी के मुद्दे और मुश्किल हालात में एक जुगाड़ का उदाहरण बनता भी नज़र आता है। 
यह खूबसूरत कहानी इराक़ में फँसे एक भारतीय परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। ‘फँसे’ शब्द का इसीलिए प्रयोग किया गया है क्योंकि फ़िल्म का प्लॉट इराक और अमरीका के युद्ध की पृष्ठभूमि पर लिखा गया है। अब यह परिवार भारत वापस आने की जद्दोजहद में लगा हुआ है, लेकिन आये भी तो कैसे? 
उनके पासपोर्ट भारत के नहीं बल्कि किसी और देश के हैं। जी हाँ, यहाँ भी जुगाड़। लेकिन कहानी का पेंच यह नहीं है, यह तो बस एक पहलू है।
असल में कहानी तो चिंटू के बर्थडे वाले दिन की है। चिंटू, एक 6 साल का बच्चा जिसका पिछले साल बर्थडे इराक के सरताज सद्दाम हुसैन और अमरीका की गहमागहमी के चलते नहीं मन पाया। उसके पापा उसे दिलासा देते हैं कि इस बार तो चिंटू का बर्थडे जरूर मनेगा। सारी तैयारियाँ हो ही रही होती हैं, इसी बीच एक धमाके की आवाज़ आती है और दो अमरीकी बंदूकधारी सैनिक चिंटू के घर दस्तक देते हैं। वह घर की तालाशी लेते हैं, तफ्तीश करते हैं। तो क्या वह वापस चले जायँगे? नहीं, अभी बहुत कुछ बाकी है। छानबीन में कुछ ऐसी चीज़ें निकलती हैं जो चिंटू के परिवार की मुश्किलें और बढा देती हैं। तो कैसे चिंटू का बर्थडे मन पायेगा? यह आप फ़िल्म में देखिए। 
महज़ 1.5 घण्टे की फ़िल्म में कुल किरदार 12 ही हैं । इतनी छोटी कास्ट के साथ यह फ़िल्म दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब रहती है। फ़िल्म का एक खूबसूरत वाकया यह भी है कि चिंटू के बर्थडे का मेहमान एक अमरीकी लड़का अपनी गर्लफ्रेण्ड के साथ आता है। वह दरवाजा खोलते अमरीकी सैनिक से कहता है, “मैं चिंटू का बेस्ट फ्रेंड और ये मेरी गर्लफ्रैंड जिसका स्कूल तुमने आज सुबह उड़ा दिया।” 
कहानी एक-दम यूनिक है और स्क्रीनप्ले मज़बूत। बैकग्राउंड म्यूजिक भी सहज लगता है।  विनय पाठक के Expressions ही उनकी अदाकारी की गवाही दे देते हैं। वहीं उनकी पत्नी बनी तिलोत्तमा शोम भी कमाल की लगती हैं। चिंटू के किरदार में वेदांत छिब्बर बड़े ही क्यूट लगते हैं तो वहीं उसकी नानी बनी सीमा पाहवा कॉमेडी का तड़का लगाती नज़र आती हैं। फ़िल्म में सभी किरदार अपनी छाप छोड़ते नज़र आते हैं।
अगर आप अंग्रेज़ी गालियों को परिवार के साथ सुन सकते हैं, तो यह एक फैमिली के साथ देखी जाने वाली फिल्म है। बाकी ऐसी कहानियों को मिस करने की गलती मत करिए क्योंकि बॉलीवुड में अच्छी फिल्में कम ही बनती हैं। यकीन मानिए यह फ़िल्म उतनी ही खूबसूरत है जितनी एक छोटे बच्चे की Smile होती है।
RATING – 3.5/5
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