कश्मीरी पंडित और कांग्रेस सरपंच अजय पंडित की आतंकी हमले में हत्या, घाटी में हुआ प्रदर्शन

कश्मीर के अनंतनाग में हुई एक कांग्रेस सरपंच कि हत्या आखिर कितनी बड़ी समस्या का हिस्सा है? ये किस विचारधारा से पैदा हुआ है? ये सभी प्रश्न भारतीय दक्षिणपंथ के लिए भी बहुत बड़ा मुद्दा है। इस देश के बहुसंख्यकों का भी ठीक यही प्रश्न रहा है। इस घटना कि ज़िम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है। यह एक कट्टरपंथी संगठन है। ठीक सत्रह साल बाद फिर से किसी कश्मीरी पंडित को निशाना बनाया गया है। कई सारे वेब पोर्टल और समाचार पत्रों ने इसे बहुत बड़ी साजिश का हिस्सा माना है।

कश्मीर में फैले आतंक के कई पहलू और अनजान किस्से हैं, जिनका बाहर आना एक बहुत बड़ी राजनैतिक साजिश का हिस्सा भी हो सकता है। वहां होने वाली घटनाओं का सही प्रकार से संप्रेषण ना हो पाना भी एक समस्या का हिस्सा रहा है। ऐसे समय में, भारतीय दक्षिण पंथ कि विचारधारा का समर्थन देने वाले सभी दलों का एकमत होकर प्रश्न करना सही है। एक हत्या के पीछे के गुनहगारों को ढूंढना और उनकी हत्या करने का कारण बहुत बड़ा प्रश्न है अपने आप में।  
दूसरी ओर अजय पंडित के पिता द्वारका नाथ पंडित का कहना था कि उनका बेटा राष्ट्रभक्त था, वह सेना के समर्थन कि बात किया करता था, उसके लिए उसका गांव और देश ही सब कुछ था। आतंकी संगठन ने उनके घर से मात्र 50 मीटर की दूरी पर इस हत्या को अंजाम दिया था। बीते चौबीस घंटो में किसी भी प्रकार की गिरफ्तारी की सूचना नहीं आई है। इससे जाहिर होता है, की ऐसी अनेक घटनाओं से निकल पाना हमारे देश की व्यवस्था के लिए आसान नहीं है।
इस घटना को सीधे तौर पर कश्मीर की 1990 की घटनाओं और 2003 जैसी घटनाओं के दोहराव होने से भी जोड़ा जा रहा है। घाटी में फैले आतंक से सभी सरकारें लड़ती आ रही हैं, देश के अमूल्य नागरिकों की जान आए दिन ऐसी घटनाओं के भेंट चढ़ती आ रही हैं। ऐसे में न्यायप्रणाली और सेना पर अब और भी दबाव बन गया है।
 घाटी में इस घटना के विरोध में सरपंचों के द्वारा एक मौन आंदोलन का भी आयोजन किया गया है। जो कि बताता है, की कश्मीर सिर्फ कट्टरपंथियों का गढ़ नहीं है। 

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