अमिताभ और आयुष्मान की नोकझोंक में ‘फत्तो बी’ ले गईं लाइमलाइट !

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Megha Kumari

filmybaapofficial

शूजित सरकार द्वारा निर्देशित अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘गुलाबो-सिताबो’ ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘अमेज़न प्राइम’ पर रिलीज हो गई है। शूजित सरकार के साथ अमिताभ बच्चन ने फिल्म ‘पिकू’ और आयुष्मान खुराना ने ‘विकी डोनर’ में काम किया है। लेकिन बता दें कि ‘गुलाबो सिताबो’ के जरिए बिग बी और आयुष्मान पहली बार साथ काम कर रहे हैं।

कहानी और किरदार :-

फिल्म की कहानी मिर्ज़ा की है जिसका किरदार अमिताभ बच्चन ने निभाया हैं। मिर्ज़ा का किरदार एक चिड़चिड़े और लालची स्वभाव के बुड्ढ़े की है, जो अपने से उम्र में 17 साल बड़ी बीवी “फातिमा” के  फातिमा महल को हथियाने में लगा है और उसे अपने नाम करवाना चाहता है।
लेकिन उस महल में उन दोनों के अलावा बहुत से किरदार भी रहते हैं, जिनमें से एक है बांके जिसका किरदार आयुष्मान खुराना ने निभाया हैं, जिनके परिवार वाले पिछले 70 सालों से महल में महज़ 30 रुपए प्रति माह का किराया देकर रह रहे हैं। वह अपनी मां और 3 बहनों के साथ रहता है। मिर्जा और बांके के बीच हमेशा लड़ाई होती रहती है मिर्जा उसे घर से बाहर निकालना चाहता है क्योंकि बांके ने काफी समय से किराया नहीं दिया है।

इन सबके बीच बांके एक दिन कॉमन टॉयलेट की दीवार को तोड़ देता है, जिसके बाद मिर्जा अपने इस फसाद को निपटाने पुलिस स्टेशन पहुंचता है।
इसी बीच एंट्री होती है आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के मिस्टर ज्ञानेश मिश्रा (विजय राज) की। ज्ञानेश एक चालाक ऑफिसर है, जो यह भांप लेता है कि यह जर्जर खंडहर महल नैशनल हैरिटेज प्रॉपर्टी बन सकता है। इसी के साथ ब्रिजेन्द्र काला की भी एंट्री होती है, जो कि प्रॉपर्टी के लफड़ों को सुलझाने में माहिर है। और इन्हीं सब लफड़ो और झंझट के साथ कहानी आगे बढ़ते जाती है… आगे क्या होता है ? प्रॉपर्टी किसके हाथ आती है ? इसके लिए आपको पूरी फिल्म देखनी होगी।

फिल्म के प्लॉट के हिसाब से लखनऊ के पुराने हिस्सों को बहुत ही शानदार तरीके से फिल्म में दिखाया गया है। इसके बावजूद भी फिल्म थोड़ी खींची हुई लगती है। इस फिल्म को ‘जूही चतुर्वेदी’ ने लिखा है, जिसके डायलॉग व्यंग के रूप में भी इस्तेमाल किए गए है जैसे कि – ” हम सरकार है, हम सब कुछ जानते है”।
इसके अलावा भी फिल्म के डायलॉग काफी जबरदस्त है जिसे सुनकर आप अपनी हसीं नहीं रोक पाएंगे। अंत में अमिताभ का हवेली को अपनी मोहब्बत बताने वाला डायलॉग दिल छू लेता है तो वहीं कुछ जगह आयुष्मान के डायलॉग बिना सिर-पैर लगते हैं।

एक्टिंग :-

बात करें फिल्म की एक्टिंग की तो अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना ने बेहतरीन एक्टिंग की है। दोनों के बोलने का स्टाइल और बॉडी लैंग्वेज काफी हटकर और अलग है। दोनों का ऐसा अवतार अब तक किसी ने नहीं देखा है। दोनों का लखनवी बोलने का अंदाज बहुत शानदार है। लेकिन इन दोनों के बावजूद ‘फातिमा बेगम’  बनी ‘फ़र्रुख़ जाफ़र’ लास्ट में सारी लाइमलाइट ले जाती हैं। सपोर्टिंग रोल में ‘बिजेंद्र काला’, ‘सृष्टि श्रीवास्तव’ और ‘विजय राज’ ने भी अच्छा काम किया है।
फिल्म की कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि ज्यादा लालच आपको कभी भी सही जगह लेकर नहीं जाता। फिल्म का निर्देशन इसकी जान है, गाने भी काफी अलग है और सटीक जगह पर फिल्माए गए हैं।

देखें या ना:-
यह एक औसत दर्जे की फिल्म है। मसाला फिल्मों से हटकर गुलाबो सिताबो ‘आर्ट’ की केटेगरी में ज्यादा फिट बैठती है। अमिताभ और आयुष्मान की बॉन्डिंग और एक छोटे शहर की अनोखी कहानी देखना चाहते हैं तो देख सकते हैं।

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